'इस्लामी शरीयत में रायशुमारी न करें'

टीम डिजिटल / अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 12 Dec 2016 07:38 PM IST
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juluse mohammadi varanasi - फोटो : अमर उजाला

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बरेली के मौलाना जिक्रउल्लाह ने कहा कि आज देश में इस्लाम कानून यानी शरीयत में हस्तक्षेप किया जा रहा है जबकि देश के कानून के तहत किसी भी व्यक्ति, संस्था व हुकूमत को ये हक हासिल नहीं है। तीन तलाक का मुद्दा भी इस्लामी शरीयत में शामिल है। लिहाजा किसी को भी इसमें रायशुमारी से परहेज करना चाहिए।
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ईद मिलादुन्नबी पर सोमवार को मरकजी दावत-ए-इस्लामी की ओर से बेनियाबाग में हुए जलसे में मौलाना ने ये बातें कहीं। मौलाना अंजुमन रजा नूरी इलाहाबाद ने कहा कि मुसलमानों को अब तक सिर्फ वोट बैंक माना गया है।
2017 के चुनाव के मद्देनजर मौलाना ने कहा कि वोट की बहुत बड़ी ताकत है। इसे मुसलमान अपने हक की लड़ाई के तौर पर इस्तेमाल करें। मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि तकरीबन 70 साल से कुर्सी और हुकूमत के लिए राजनीति हो रही है लेकिन पार्टी व उनके जिम्मेदारों से दरखास्त है कि वो अब मुल्क की हिफाजत के लिए राजनीति करें।
मौलाना उजैर आलम ने भी तकरीर पेश की। अध्यक्षता मौलाना अब्दुल हादी खां ने की। संचालन मौलाना हसीन अहमद व नफीस अहमद ने किया। जलसे के पहले संस्था की ओर से जुलूस-ए-मोहम्मदी भी निकाला गया।

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