मदर्स डे विशेष: मां और बेटे की ये कहानी बड़ी ही दिलचस्प, मेहनत से हासिल किया ये मुकाम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 10 May 2020 11:36 AM IST
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रेखा मौर्या (फाइल फोटो)।
रेखा मौर्या (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

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वाराणसी के राजातालाब के एक छोटे से गांव की रहने वाली किसान की बेटी रेखा मौर्या को बचपन से ही खेलों में रुचि थी। मगर एक लड़की होने के नाते कई मर्यादाओं का पालन भी जरूरी था। बावजूद इसके राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
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मगर नेशनल में खेलने का सपना अधूरा रह गया। रेखा ने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपने बेटे को इस काबिल बनाया और बेटे ने मां के सपने को पूरा कर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
रेखा पांच बहन और एक भाई में सबसे छोटी हैं। उनका विवाह 18 वर्ष की उम्र में सन 2003 में चिरईगांव में हुआ। ससुराल में तमाम सामाजिक बंदिशों के बावजूद अपने परिजनों से अनुमति लेकर रेखा ने पढ़ाई-लिखाई और खेल जारी रखा। इस बीच दो बच्चों की मां भी बनी।
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