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Digital Edition

सीएम योगी आज काशी में : मुख्यमंत्री देखेंगे रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, जानेंगे विकास की हकीकत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वाराणसी आएंगे। वह गोद लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने सीधे हाथी बाजार स्थित हैलीपैड पर पहुंचेंगे। यहां से निरीक्षण के बाद वह परियोजनाओं का भी निरीक्षण करेंगे। अपराह्न सर्किट हाउस में वाराणसी के विकास कार्य और कानून व्यवस्था की समीक्षा करेेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के बाद कॉरिडोर का काम भी देखेंगे। इससे पहले कालिका धाम का पुल, रिंग रोड फेज-2, गोदौलिया व बेनियाबाग पार्किंग का निरीक्षण करेंगे। यहां से रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर भी जाएंगे और उसके पूरे हुए निर्माण को देखेंगे। साथ ही जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर अधिकारियों के कामकाज का भी फीडबैक लेंगे। सीएम शुक्रवार को रात्रि विश्राम कर शनिवार सुबह लखनऊ रवाना होंगे।

दो दिवसीय वाराणसी प्रवास पर आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछड़ी परियोजनाओं की हकीकत देखेंगे। सड़क, पुल और पार्किंग की परियोजनाओं की मौके पर ही समीक्षा करेंगे। माना जा रहा है कि जनता की सहूलियत से जुड़ी परियोजनाओं की लेटलतीफी पर सीएम ने सख्त रुख अख्तियार किया है।

उधर, सीएम के आगमन से पहले परियोजनाओं पर मजदूरों की संख्या बढ़ाकर काम की गति तेज करने की कोशिश की जा रही है। आइए सीएम के निरीक्षण वाली परियोजनाओं पर एक नजर डालते हैं। 

 
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सीएम योगी करेंगे वाराणसी का दौरा। सीएम योगी करेंगे वाराणसी का दौरा।

कुशीनगर: गंडक नदी की बीच धारा में फंसे थे नाव सवार सैकड़ों लोग, रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की गंडक नदी में फंसी नाव पर सवार सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। एसडीआरफ टीम ने रात में ही मोर्चा संभाला और सुबह छह बजे तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
 
डीएम एस राजलिंगम और एसपी सचिंद्र पटेल पूरी रात मौके पर डटे रहे। सुबह छह बजे अंतिम खेप लेकर एसडीआरफ टीम जब किनारे पर पहुंची तब जाकर दोनों अफसर वहां से वापस लौटे। 

जानकारी के मुताबिक, बरवापट्टी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमवाखास के बरवापट्टी घाट पर गुरुवार की शाम लगभग सात बजे नदी पार कर रहे लगभग 150 लोग नाव समेत नदी में फंस गए। नाव में लगे इंजन में आई तकनीकी खामी के चलते नाव धारा में फंस गई। करीब पांच किलोमीटर बहकर नाव संपूर्णानगर गांव के सामने धारा में रुक गई। 
 
नदी के उत्तर तरफ बसे ग्राम सभा अमवाखास के टोला भगवानपुर, बनरही, सम्पूर्णा नगर, किशुनवा, बक्सर आदि में दक्षिण तरफ के किसान खेती करने गए थे। ग्रामीण अपना खेत देखकर बड़ी नाव से शाम करीब सात बजे अपने घर वापस आ रहे थे। इसी बीच नाव का इंजन बंद हो गया। नाव पर सवार ग्रामीणों में चीख पुकार मच गई। 
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खुलासा: विदेश में रह रहे डॉक्टर के घर में चल रहा था सेक्स रैकेट, कमरे में महिला और पुरुष तोड़ रहे थे सारी हदें

यूपी के रायबरेली जिले में मिल एरिया थाना इलाके के जवाहर विहार मलिकमऊ में एक डॉक्टर के मकान में सेक्स रैकेट चल रहा था। मकान की देखभाल करने वाला युवक इस गोरखधंधे को संचालित कर रहा था। गुरुवार को सीओ व थानेदार ने मकान में छापा मारकर केयर टेकर संतोष कुमार और उसके साथी को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस एक महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। तलाशी में पुलिस को मौके से आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है। सीओ सदर महिपाल पाठक ने बताया कि सूचना मिली थी कि जवाहर विहार मलिकमऊ में एक डॉक्टर के मकान में सेक्स रैकेट चल रहा है। डॉक्टर विदेश में रहते हैं। सूचना पर छापा मारा गया तो मौके से एक महिला मिली। साथ ही मौके से दो युवक पकड़े गए। थानेदार आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि अमेठी जिले के मोहनगंज थाना क्षेत्र के साहेमऊ निवासी संतोष कुमार, रायबरेली शहर के छोटा घोसियाना मलिकमऊ रोड निवासी मो. रईस अहमद को मौके से पकड़ा है। इनके पास से चार मोबाइल, 1260 रुपये की नकदी और आपत्तिजनक सामग्री मिली है। दोनों को जेल भेज दिया गया है। संतोष सेक्स रैकेट चला रहा था।
 
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राममंदिर ट्रस्ट को घेरने की कोशिशों को झटका: रजिस्ट्री के एक माह बाद तहसीलदार ने दी क्लीनचिट, यहां से शुरू हुई थी गड़बड़ी

97 साल पुराने वक्फ डीड के आधार पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को घेरने की तैयारी कर रहे लोगों को झटका लगा है। रजिस्ट्री के एक माह बाद हरीश पाठक और कुसुम पाठक के पक्ष में हुए नामांतरण में सभी आरोप खारिज कर दिए गए।

वक्फ डीड के परीक्षण का हवाला देते हुए तहसीलदार ने लिखा है कि जिन पुराने नंबरों से नए नंबर का दावा किया जा रहा है, वह गलत है। वक्फ की जमीन के पुराने गाटा संख्या 271, 272, 273, 274, 275,276 व 277 का कोई भी क्षेत्रफल नई गाटा संख्याओं 242, 243,244, 246 में शामिल नहीं है। बल्कि इसका गाटा संख्या 256, 257,258, 259. 260 और 262 है। 13 मई 1924 को फकीर मोहम्मद पुत्र निरह व उनकी पत्नी बख्तावर बीबी निवासी बरवारी टोला अयोध्या की कोई औलाद नहीं होने से अपनी समस्त भूमि अल्लाहताला के नाम वक्फ को देने का आवेदन किया। तब पूरी मिल्कियत की मालियत 12 हजार थी, जो दफा-30 के तहत 20 मई 1924 को रजिस्टर्ड हो गया। 

इसके साथ संपत्ति को बेचना, खरीदना, गिरवी रखना अवैध हो गया। रजिस्टर्ड वक्फनामा में भूमि बंदोबस्त के पहले के नंबर गाटा संख्या 271, 272, 275, 276, 274, 273 व 277 से मौजा बाग बिजैसी दर्ज था, इसे लेकर दावे किए गए कि भूमि बंदोबस्त के बाद बदलकर उक्त गाटा संख्या 242/1, 242/2, 243, 244 246 हो गया। 

वक्फ कर्ता बख्तावर बीबी व फकीर मोहम्मद के नाम फसली 1344 में खाता संख्या 3 में अंकित गाटे 242, 243, 244 व 240 मौजा बाग बिजेसी अंकित है। खतौनी उर्दू में है। इससे बने नए गाटे पूरी तरह स्पष्ट हैं। गाटा संख्या 274 व 276 से नया गाटा 242 बना है। 
 
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यूपी: हथियारों व अन्य रक्षा उपकरणों का मुख्यालय होगा कानपुर, केंद्र ने 41 निर्माणियों को सात कंपनियों में बांटा

श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई भूमि
केंद्र सरकार ने कानपुर समेत देश भर की 41 आयुध निर्माणियों को सात कंपनियों में बांटा है। ये सभी कंपनी पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) होंगी। इसमें से तीन कंपनियों के हेडक्वार्टर शहर में होंगे। इन सभी जगहों पर 22,103 कर्मचारी अधिकारी काम करेंगे। इन तीनों कंपनियों का 2020 का राजस्व 2404 करोड़ रहा है।

सूत्रों ने बताया कि सरकार ने एम्युनिशन और एक्प्लोसिव, व्हीकल, वेपन एंड एक्विपमेंट, ट्रूूप कंफर्ट आइटम, एंसीलरी, आप्टो इलेक्ट्रानिक्स और पैराशूट पीएसयू बनाया है। शहर में पांच आयुध निर्माणियां हैं। जिसमें आयुध निर्माणी कानपुर ओएफसी और फील्डगन फैक्टरी को वेपन एंड एक्विपमेंट में शमिल किया गया है।

 
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संकट : गंगा दशहरा से पहले रेत में दबे महीनों पुराने शवों से उठने लगी दुर्गंध, प्रदूषण का खतरा बढ़ा

गंगा दशहरा से पहले कटान और जलस्तर बढ़ने से रेत में दबी लाशों से जल प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। इस बार गंगा दशहरा 20 जून को है। मान्यता है कि दशहरा पर गंगा में डुबकी लगाने से 10 तरह के पाप धुल जाते हैं, लेकिन कोरोना काल में गंगा के तटों पर दफनाए गए सैकड़ों शव अब प्रदूषण का कारण बन गए हैं। महीनें पुराने शवों से जहां दुर्गंध उठ रही है, वहीं उनसे संक्रमण का भी डर बना हुआ है। फिलहाल हर रोज निकले रहे ऐसे शवों को गंगा से छानकर अंतिम संस्कार कराया जा रहा है,ताकि उन्हें बहने से रोका जा सके।

कोरोना काल में गंगा किनारे बड़ी संख्या में दफनाए गए शवों से बारिश के मौसम में प्रदूषण का खतरा बढ़ने का अंदेशा है। बीते अप्रैल-मई महीने में कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की पर्याप्त व्यवस्था न होने से फाफामऊ, छतनाग घाटों पर सैकड़ों शवों को रेत में दफना दिया गया था। कोराना संक्रमण की दूसरी लहर ठंडी पड़ गई है, लेकिन फाफामऊ घाट पर रेत से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। कहा जा रहा है कि यह सभी शव कोरोना संक्रमितों के हैं, जिन्हें जलाने की बजाए रेत में ही दबा दिया गया था।
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यूपीपीएससी : प्रवक्ता के 124 पदों पर होगी भर्ती, आवेदन शुक्रवार से

Dhumavati Jayanti 2021: धूमावती जयंती आज, ऐसे पाएं देवी मां का आशीर्वाद

ज्येष्ठ मास की अष्टमी तिथि शुक्रवार यानी आज मां धूमावती की जयंती मनाई जा रही है। विशेष साधक धूमावती माता की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया जा रहा है। पंडित शरद चंद्र मिश्रा ने बताया कि मृत्यु की देवी कहलाई जाने वाली धूमावती देवी का निवास श्मशान में माना जाता है और इनका वाहन कौआ है। धूम्र वर्ण के कारण इन्हें धूमावती कहा जाता है।

ये वृद्धा एवं विधवा के रुप में दिखती हैं। तंत्र में इन्हें महान शिक्षिका एवं ब्रह्मांड संबंधी रहस्यों को जानने वाली देवी माना जाता है। इनकी साधना सामान्य साधक को नहीं करनी चाहिए। योग्य गुरू से दीक्षा लेकर उनके संरक्षण में ही इनकी साधना करनी चाहिए। साधक को इनकी साधना से कई दिव्य और मायावी विद्याओं में सिद्धि प्राप्त होती है। ऐसी विद्याओं को कारण साधक अंत में मोक्ष भी प्राप्त कर लेता है।

ऐसे हुई थी धूमावती माता की उत्पत्ति
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, सती के पिता राजा दक्ष अपने दामाद भगवान शंकर के प्रति सदभाव नहीं रखते थे। ऐसे में जब उन्होंने विशाल यज्ञ का आयोजन किया तो उन्होंने शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया। बावजूद इसके सती की इच्छा अपने मायके जाने की थी। जब इसके लिए उन्होंने भगवान शिव से अनुमति मांगी तो भगवान शिव ने कहा कि जहां मान-सम्मान न हो, वहां नही जाना चाहिए।

वास्तव में देवी सती अपने पिता दक्ष के अपमान से कुपित थी। महादेव के मना करने पर वे यज्ञ मे जाकर यज्ञ को नष्ट करने की बात करते हुए भयानक रूप में आ गई। उस भयानक देवी ने अपने शरीर से दस देवियों को प्रकट कर उन्हें दसों दिशाओं में शिव का मार्ग रोकने का आदेश दिया।

भगवान शिव ने देवी सती से उन दस देवियों का परिचय पूछा, तो उन्होंने अपनी दस महाविद्याओं का एक-एक कर परिचय दिया। इस दौरान उन्होंने देवी धूमावती के बारे में परिचय देते हुए कहा कि आपके अग्निकोण में जो विधवा रूप में महेश्वरी हैं, वे महाविद्या धूमावती हैं।
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