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पुलिस स्मृति दिवस 2020: सीएम योगी ने की पुलिस की तारीफ, कोविड-19 से निपटने में निभाई अहम भूमिका

राजधानी लखनऊ स्थित पुलिस लाइन में पुलिस स्मृति दिवस 2020 कार्यक्रम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री ने संबोधित करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। 

सीएम योगी ने कहा कि 2019-20 में उत्तर प्रदेश पुलिस के नौ जवान शहीद हुए हैं। शहीद के परिजनों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। 26 करोड़ रुपये 122 शहीदों के परिजनों को दिए।

सीएम ने कहा कि बिकरु कांड में शहीद पुलिस कर्मियों को 50 लाख की जगह एक करोड़ रुपये दिए गए। मनोबल बढ़ाने के लिए 26 जनवरी और 15 अगस्त को विभिन्न पदक दिए गए।

इस दौरान सीएम योगी ने पुलिस के लिए किए गए कामों को गिनाया। उन्होंने कहा कि अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस है, 125 बदमाश एनकाउंटर में मारे गए हैं, जबकि 2607 घायल हुए हैं। 
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पुलिस स्मरणोत्सव दिवस 2020 पुलिस स्मरणोत्सव दिवस 2020

यूपी: विवाहिता की संदिग्ध मौत के चंद घंटों बाद ससुर का शव भी फांसी पर लटकता मिला

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सांडी थाना इलाके के ग्राम सिपहिया में विवाहिता की संदिग्ध हालात में मौत के चंद घंटों बाद ही उसके ससुर का शव भी गांव के बाग में फांसी पर लटकता मिला। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 

सिपहिया निवासी आरती (25) पत्नी अजय की मंगलवार देर शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मृतका के पति अजय के मुताबिक आरती ने कच्ची कोठरी में शाल से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना की सूचना पर मृतका के पिता राकेश निवासी चौहानथोक कोतवाली शहर मौके पर पहुंचे। 

उन्होंने संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की बात कहते हुए पुलिस को सूचना दी और शव को पोस्टमार्टम कराने की मांग की। ग्रामीणों के मुताबिक इसी दौरान राकेश ने नाराजगी में मृतका के ससुर अहिबरन (58) को भी उलाहना और धमकी दे दी। 

देर रात पुलिस ने आरती के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया। इसके बाद अहिबरन घर से निकल गया और कोई पता नहीं चला। बुधवार सुबह उसका शव उसके ही बाग में कटहल के पेड़ पर अंगौछे से फांसी पर लटकता मिला। इसकी सूचना भी परिजनों ने पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। फिलहाल आरोपों को लेकर कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई है।
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यूपी: जौनपुर में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला पर राजद्रोह का परिवाद, अनुच्छेद 370 और 35ए पर दिया था ये बयान

अनुच्छेद 370 और 35ए के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की ओर से दिए गए बयान को जौनपुर के सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर किया है। न्यायालय ने इस पर सुनवाई के लिए पांच दिसंबर की तिथि नियत की है। 
अरुण कुमार सिंह ने अधिवक्ता रणंजय सिंह के माध्यम से परिवाद प्रस्तुत करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने 11 अक्तूबर 2020 को अनुच्छेद 370 व 35ए के संबंध में कहा है कि इन दोनों धाराओं की बहाली में चीन से मदद मिल सकती है।


370 हटाना हमें कबूल नहीं है। जब तक 370 बहाल नहीं होता तब तक हम लोग रुकने वाले नहीं हैं। इस प्रकार के उनके बयान का प्रसारण एवं प्रकाशन परिवादी एवं गवाहों ने देखा एवं सुना।
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UP Bypolls: देवरिया में 53 वर्ष के इतिहास में कोई महिला नहीं बनी विधायक

फारुख अब्दुल्ला
लोकसभा, विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत में महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा रहती हैं, लेकिन देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के 53 वर्ष के इतिहास में 14 बार हुए चुनाव में कोई महिला अब तक विधायक नहीं बन सकी। महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने वाले जब चुनाव में टिकट देने की बात आती है तो सभी राजनीतिक दल चुप्पी साध लेते हैं।

देश में वर्ष 1935 में भारत शासन अधिनियम में भारतीय महिलाओं को मत देने एवं चुनाव लड़ने का अधिकार प्रदान किया गया। दहलीज के भीतर लोकतंत्र की साख बढ़ी है। इसके बावजूद सदर विधानसभा क्षेत्र में 14 बार हुए चुनाव में कभी कोई महिला न मुख्य लड़ाई में रही और न ही चुनाव ही जीत सकीं। इस बार के चुनाव में 20 अक्तूबर तक के आंकड़ों में कुल मतदाता 3,36,565 हैं। इसमें 1,54,302 महिलाएं हैं।

विभिन्न राजनीतिक दल महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। उन्हें रिझाने के लिए अपनी-अपनी पार्टी की महिलाओं की टीम भी उतार देते हैं, लेकिन टिकट की बात आती है तो उन्हें अनसुना कर दिया जाता है। जो भी हो इस बार के उपचुनाव में निर्णायक भूमिका में महिलाएं होंगी। वैसे कोई महिला प्रत्याशी इस बार के चुनाव में अपना भाग्य नहीं आजमा रही हैं।
 
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कोरोना काल में संघ ने बढ़ाया अपना कुनबाः ताकतवर हुआ तंत्र, हर प्रांत में बढ़े स्वयंसेवक

कोराना काल में भी संघ अपना विस्तार करने में कामयाब रहा। गांव से लेकर गरीबों की बस्ती तक जरूरतमंदों को मदद पहुंचाकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई। जिन इलाकों में संघ का कोई स्वयंसेवक नहीं हुआ करता था वहां भी अच्छी-खासी फौज खड़ी हो गई।

संघ के सेवाभाव से प्रेरित होकर नौजवान संगठन से जुड़ते चले गए। इससे न केवल स्वयंसेवकों की संख्या में खासा इजाफा हुआ बल्कि नियमित शाखाओं की संख्या भी बढ़ गई। ब्रज, मेरठ, उत्तराखंड, काशी, अवध और गोरखपुर क्षेत्र में बड़ी वृद्धि बताई जा रही है।   

सेवा भारती के माध्यम से ही 1000 से ज्यादा कैंप प्रदेश भर में लगाए गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अगर बात करें तो गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ में संघ ने लॉकडाउन के दौरान फंसे मजदूर और अन्य लोगों को घरों तक पहुंचाया। बुंदेलखंड में भी मदद को खूब हाथ बढ़े।

लखनऊ-दिल्ली हाईवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ हाईवे पर मजदूरों की मदद को हेल्प डेस्क तक खोली गईं। कानपुर प्रांत के सह कार्यवाह  अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग संघ से जुड़े हैं। स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सहायता कैंप तक नौजवानों ने लगाए हैं। अब वे शाखाएं तक लगा रहे हैं।  

कानपुर प्रांत में शाखाओं की संख्या 15000 के पार
संघ में संगठन के लिहाज से कानपुर प्रांत को काफी मजबूत माना जाता है। 22 जिलों वाले इस प्रांत में 15000 शाखाएं लग रही हैं। इनमें 3000 से ज्यादा शाखाएं तो नियमित चलती हैं। अगर कोरोना काल से पहले की बात की जाए तो शाखाओं की संख्या 12000 के करीब थी। जबकि नियमित शाखाओं की संख्या भी 2100 के लगभग थी।

कुल मिलाकर शाखाओं की संख्या में इजाफा हुआ है। संघ के पदाधिकारी कहते हैं कि स्वयंसेवकों ने कोराना काल में लोगों की बड़ी मदद की है। फंसे मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया। भोजन पानी की व्यवस्था कराई। इससे वह लोग संघ से जुड़ गए। प्रशासन और शासन की मदद से लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराए गए। सेवा भारती के कैंप अभी तक संचालित हो रहे हैं। झांसी मेडिकल कालेज में भी कैंप चल रहा है।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वयंसेवकों में सर्वाधिक वृद्धि
अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो संघ के तीन प्रांत हैं जिनमें मेरठ, ब्रज और उत्तराखंड आता है। इन तीनों प्रांतों में स्वयंसेवकों की संख्या सर्वाधिक बढ़ी है। ब्रज में ही नए स्वयंसेवकों की संख्या 10 हजार से ज्यादा बताई जा रही है जबकि मेरठ और उत्तराखंड में भी 15 से 20 हजार नए स्वयंसेवक बढ़े हैं।

कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में संघ ने इस बीच काफी विस्तार किया है। कोराना काल में संघ से जुड़े सभी संगठन लोगों की मदद करते रहे। इससे लोगों में संघ के प्रति विश्वास पैदा हुआ है। उत्तराखंड में भी काफी इजाफा माना जा रहा है। उत्तराखंड में तो अभी तक कैंपों का संचालन किया जा रहा है। दवाई और कपड़े तक उपलब्ध कराए गए।
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यूपी: घाटमपुर में बाइक सवार बैंक मैनेजर पिता व पुत्र को अज्ञात वाहन ने रौंदा, दर्दनाक मौत

अब उत्तर प्रदेश के हर जिले में होगा एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई थाना, शासनादेश जारी

मानव तस्करी रोकने के लिए अब हर जिले में एक एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई का थाना होगा। शासन ने 40 नए ज़िलों में इन थानों की स्थापना के लिए स्वीकृति दी है।  मंगलवार को इस संबंध में अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी की ओर से शासनादेश जारी कर दिया गया। 

जानकारी के अनुसार प्रदेश में पहले कुल 35 जिलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई के थाने थे। यह थाने 2011 और 2016 में स्थापित हुए थे। नए थाने केंद्र सरकार के विमन सेफ्टी डिवीज़न के निर्देश के बाद स्थापित किये गए हैं। जिसके लिए केंद्र से इसके लिए धन भी आवंटित कर दिया गया है। 

जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने पहले से स्थापित 35 थानों को 12 लाख रुपये की दर से 4 करोड़ 20 लाख रुपए और 40 नए थानों के लिए 15 लाख रुपए की दर से छह करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश सरकार को दिए हैं। 
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