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Sp baghpat said

28 मार्च 2020

उत्तर प्रदेश

रविवार, 29 मार्च 2020

लॉकडाउन: घर पहुंचने की जिद के आगे भूख प्यास बेदम, रोते हुए सुनाई आपबीती, बोले पैरों में पड़ गए छाले

अमर उजाला पड़ताल: लॉकडाउन में किराने की दुकानें खुलीं, आटा नहीं मिला, भटकते रहे लोग

आगरा में प्रशासन की ओर से तय की गई किराना की दुकानें तो शनिवार को खुल गईं, लेकिन इन पर आटा नहीं मिला। मंडी से 10 फीसदी दुकानों को भी आटे की सप्लाई नहीं हो पाई। लोग सुबह से ही पहुंच गए थे। मायूस होकर लौटे। आटा के अलावा तेल, दाल, चीनी सहित खाद्य सामग्री की होम डिलीवरी नहीं हुई।

ईजी-डे से लौटे ग्राहक

भावना एस्टेट स्थित ईजी-डे में दोपहर एक बजे तक आटा नहीं था। हर पांच मिनट पर आटे की होम डिलीवरी कराने के लिए कॉल आ रही थी। कर्मचारी आश्वासन दे रहे थे कि रविवार तक आटा आ जाएगा। उनका कहना था अन्य स्टोर पर भी आटा नहीं है।

कारगिल में भटकते रहे लोग 

यहां किराना की दुकानें बंद थी। पतंजलि का स्टोर खुला तो लोग यहां आटा लेने के लिए पहुंच गए। यहां भी आटा नहीं मिला। दोपहर के दो बजे तक बोदला तक कोई और दुकान खुली ही नहीं थी।
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प्रयागराज में लॉकडाउन में चोरी छिपे बेची जा रही शराब, निर्धारित रेट से कई गुना ज्यादा ले रहे दाम

लॉकडाउन में चौतरफा पुलिस की तैनाती होने के बावजूद चोरी छुपे शराब बेची जा रही है। पिछले 4 दिनों में धूमनगंज, करेली और कीडगंज थाना क्षेत्र में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें लोग शराब के साथ पकड़े गए। खास बात यह है कि लॉक डाउन के दौरान शराब के लिए निर्धारित रेट से कई गुना ज्यादा दाम वसूला जा रहा है।

लॉक डाउन के दौरान शराब बेचे जाने का पहला मामला 24 मार्च को पकड़ में आया। जब करेली पुलिस ने यमुना कछार के पास से करेलाबाग निवासी सिकंदर निषाद को 10 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार किया। उससे पता चला कि वह चोरी छुपे बेचने के लिए शराब लेकर जा रहा था और पिछले कई दिनों से इस काम में लगा हुआ है।

इसी के अगले दिन यानी 25 मार्च को धूमनगंज के नीवा में दो लोगों को एक पेटी अंग्रेजी शराब के साथ पकड़ा गया। पकडे गए दोनों व्यक्तियों ने अपना नाम अशोक नगर निवासी मोहम्मद तालीम और बेली निवासी मोनू पाल बताया। इसी तरह 26 मार्च को बैरहना में झूंसी निवासी सतीश जायसवाल को क्वाटर की 65 बोतलों के साथ गिरफ्तार किया गया। लगातार सामने आ रहे मामलों से साफ है कि चौतरफा कड़ी सुरक्षा के बावजूद शराब बेचने वाले अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। 

सूत्रों का कहना है कि लॉक डाउन की चलते चोरी छिपे शराब बेचने वाले तय रेट से कई गुना ज्यादा दाम भी वसूल रहे हैं। ¹65 के पौव्वे के लिए 200 से ढाई सौ रुपए तक लिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जार्जटाउन के अल्लापुर, करेली के यमुना कछार, कीडगंज नई बस्ती, धूमनगंज के नीवा, शिवकुटी के नया पुरवा, दारागंज की बख्शी, अलोपी बाग, अतरसुइया के रानी मंडी में चोरी छिपे शराब की बिक्री की जा रही है। इस मामले में पुलिस अफसरों का कहना है कि अवैध रूप से शराब बेचे जाने की शिकायतें मिली थी जिस पर कार्रवाई की गई है।
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Coronavirus in Uttar Pradesh Live Updates: यूपी में एक दिन में 14 नए मरीज, अब तक 65 लोग कोरोना संक्रमित

यूपी में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शनिवार को एक ही दिन 14 नए मरीज सामने आने के साथ ही प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 65 हो गई है। इनमें नोएडा में 9, मेरठ में 4 और वाराणसी में एक कोरोना पॉजिटिव मिला। नोएडा में सर्वाधिक 27 लोग पॉजिटिव हैं। आगरा में अब तक 10, लखनऊ में 8, गाजियाबाद में 5, मेरठ में 5, पीलीभीत व वाराणसी में 2-2, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, कानपुर, जौनपुर, शामली, बागपत में एक-एक पॉजिटिव मिले हैं।

राज्य संक्रामक रोग निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ. विकासेंदु अग्रवाल ने बताया कि शनिवार तक कोरोना संक्रमण से प्रभावित देशों से आए 50,040 यात्रियों की पहचान की गई। इसके अलावा विदेश से आए 49,488 लोगों की पहचान की गई है। इनमें से 8171 यात्रियों की शनिवार तक पहचान की गई है। सभी को होम क्वारंटीन में रखा गया है। 

सीएम ने कहा- तीन दिन में आए एक लाख लोगों को क्वारंटीन कराएं
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले तीन दिन में एक लाख अतिरिक्त लोग दूसरे राज्यों से आए हैं। उन्होंने इन सभी को सर्विलांस पर रखने और क्वारंटीन करने का निर्देश दिया। इन सभी के नाम, पते, फोन नंबर समेत सूची संबंधित जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा है।
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लॉकडाउन की घोषणा के बाद घर जाने की कोशिश करते लोग लॉकडाउन की घोषणा के बाद घर जाने की कोशिश करते लोग

मेरठ में मिले चार नए कोरोना पॉजिटिव केस, 50 आइसोलेशन वार्ड में भर्ती, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में कोरोना वायरस के चार और नए केस मिले हैं। इससे पहले शुक्रवार को मेरठ मेडिकल अस्पताल में एक व्यक्ति को कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। अब उसकी पत्नी और तीन सालों को भी कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 

बता दें कि शनिवार को मेडिकल की लैब में 25 टेस्ट हुए। जिनमें से 21 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। जबकि चार में कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई हैं। इसके अलावा 21 सैंपल सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर के हैं, ये सभी नेगेटिव हैं।

बताया गया कि 50 को आइसोलेशन में भर्ती कराया गया है। इनमें 35 सुभारती और 15 मेडिकल में भर्ती है। इन सभी के रविवार को टेस्ट होंगे। वहीं मरीज के खिलाफ प्रशासन द्वारा एफआईआर की तैयारी चल रही है।

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कोरोना वायरसः यूपी सरकार का फैसला, जेलों में बंद 11 हजार कैदियों को मिलेगी 2 माह की पैरोल

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जेलों में कैदियों का दबाव कम करने के मद्देनजर सर्वोच्च अदालत के निर्देशों पर सात साल तक की सजा वाले कैदियों को पैरोल देने का कार्यवाही शुरू कर दी गई है। उतर प्रदेश की कुल 71 जेलों में बंद ऐसे 11 हजार बंदियों को तत्काल मुक्त करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।  

कारागार महानिदेशक आनंद कुमार के अनुसार इनमें विचाराधीन व सिद्धदोष बंदी दोनों ही शामिल हैं। इन सभी बंदियों को अंतरिम जमानत पर आठ सप्ताह के लिए निजी मुचलके पर पैरोल पर रिहा किया जा रहा है। निमें 8500 विचाराधीन व 2500 सिद्धदोष बंदी शामिल हैं। 

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कियाथा। यह बैठक शुक्रवार को उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसमें अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी व महानिदेशक कारागार आनंद कुमार शामिल थे। इन 11 हजार बंदियों को रिहा करने का फैसला इसी समिति ने लिया। 
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कोरोना: 94 बंदी आठ हफ्ते के पैरोल पर मंडलीय कारागार से किए गए रिहा

इलाकों को पूरी तरह सील कर दिया गया है
कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से मंडलीय कारागार में बंद 94 बंदियों को शनिवार की देर रात आठ हफ्ते के पैरोल पर रिहा कर दिया। सरकार से आदेश आने के बाद जेल प्रशासन ने देर शाम कोर्ट से अंतरिम जमानत लिया। जिसके बाद जेल प्रशासन ने जिला प्रशासन से गाड़ी मंगाकर देर रात दस बजे पुलिस सुरक्षा में इन्हें इनके घर के लिए रवाना किया।

प्रदेश की सभी जेलों में इस समय क्षमता से दोगुने बंदी और कैदी हैं। मंडलीय कारागार में भी क्षमता करीब 850 की है जबकि वर्तमान समय में करीब सत्रह सौ बंदी हैं। जिससे बंदियों में कोरोना फैलने का खतरा था। 

जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के साथ ही प्रदेश के सभी जेलों से सात साल से कम सजा वाले कैंदियों, बंदियों और आदर्श बंदियों को पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद डीजी जेल ने सभी जेलों से ऐसे बंदियों और कैदियों की सूची मांगी थी।

गोरखपुर जेल प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व सात साल की सजा पा चुके 27 सजायाफ्ता कैदियों, सात साल से कम सजा के अपराध वाले आरोप में बंद 167 विचाराधीन बंदियों और हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे तीन आदर्श कैदियों (जिनकी उम्र साठ वर्ष से ज्यादा हो चुकी है) सुदामा, वंशबहादुर और शेषनाथ की सूची भेजी थी। 

जिसके बाद शनिवार की दोपहर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के ग्यारह हजार बंदियों की घोषणा की थी। जिसमें गोरखपुर के 141 बंदियों को छोड़ने की अनुमति मिली। आदेश मिलने के बाद जेल प्रशासन ने कोर्ट से आठ सप्ताह के लिए इन बंदियों की अंतरिम जमानत मांगी। 

देर शाम सात साल से कम सजा वाले अपराध के आरोप में बंद 93 विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत मिल सकी। जिसके बाद जेल प्रशासन ने इन बंदियों को उनके घर पहुंचाने के लिए प्रशासन से गाड़ियां मांगी। 

प्रशासन से गाड़ियां मिलने के बाद देर रात दस बजे इन्हें जेल से रिहाकर घरों के लिए पुलिस सुरक्षा में रवाना किया गया। सोमवार को एक बार फिर कोर्ट के बैठने पर अन्य बंदियों व सजायाफ्ता कैदियों की रिहाई होने की संभावना है।
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ग्राउंड रिपोर्ट: लॉकडाउन के बाद परदेस में आसरा नहीं, गांव भी हुआ पराया

लॉकडाउन के बाद जो सबसे बड़ी समस्या उभरकर सामने आई वो है शहरों से गांवों की ओर लोगों का पलायन। दिहाड़ी मजदूर इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़ेंगे ये किसी ने नहीं सोचा था। कुछ मजदूर कई दिन पैदल चलने के बाद जब अपने गांव पहुंच रहे हैं तो वहां भी उनके लिए मुसीबत खड़ी हो रही है। कई गांवों के लोग नहीं चाहते हैं कि बाहरी लोगों का प्रवेश गांव में हो। भले ही वह गांव का रहने वाला हो और बाहर से आ रहा हो। ऐसे ही कुछ गांवों से अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट-  

आगरा: इस गांव में बाहरी व्यक्ति और रिश्तेदार ना आएं...ग्रामीणों ने लगाए बैनर
अब तक शहरवासी भी कोरोना से बचाव में लापरवाही कर रहे हैं तो एक गांव ऐसा भी है जो जागरुकता की मिसाल पेश कर रहा है। यहां ग्रामीणों ने किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर रोक लगा दी है। इसके लिए बाकायदा गांव के बाहर बैनर भी लगाया गया है। ये गांव है विकास खंड सुल्तानगंज का अकबलेपुर।
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महराजगंज: रिश्तेदारों को भी फोन कर बताया दिया गया है कि घर पर न आवें
कोरोना का दहशत इस कदर अब हाबी हो चुका है कि लोगों ने गांव के बाहर नो-एंट्री का बोर्ड लगा दिया है। इतना ही नहीं अब रिश्तेदारों को भी फोन कर बताया दिया गया है कि घर पर न आवें। हालत यह है कि गांव को जाने वाली सड़क सुनी पड़ी है। गांव को जाने वाली सड़क पर लगा नो-एंट्री का बोर्ड लोगों के जागरूकता की कहानी को बयां करने के लिए काफी है। आगे पढ़े...
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हरदोई: लॉकडाउन के बीच मंदिर की चौखट पर हुआ प्रसव, पति के साथ साइकिल से सीएचसी जा रही थी महिला

हरदोई के बिलग्राम में लॉकडाउन के बीच शनिवार को प्रसव पीड़ा होने पर पति के साथ साइकिल से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रही महिला का प्रसव रास्ते में एक मंदिर के निकट हो गया। मंदिर के निकट रहने वाले वाली महिला ने प्रसव कराया।

बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के ग्राम महमूदनगर निवासी राम नरेश की पत्नी प्रेमा देवी गर्भवती थी। शनिवार शाम प्रसव पीड़ा होने पर रामनरेश अपनी पत्नी को साइकिल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलग्राम जा रहे थे।

बिलग्राम कस्बे में बाबा विश्वनाथ मंदिर के बाहर गर्भवती पत्नी को बैठाकर रामनरेश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की मौजूदगी की जानकारी करने चले गए । इसी दौरान प्रेमा देवी को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी और वह चिल्लाने लगी।

मंदिर के पड़ोस में ही रहने वाली संतोषी गुप्ता पत्नी वेद प्रकाश गुप्ता  आवाज सुनकर घर से बाहर निकलीं और महिला को देखा । आनन फानन ही संतोषी ने चादर बांधकर आड़ में महिला का प्रसव कराया।

बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एंबुलेंस से जच्चा बच्चा को अस्पताल भेज दिया गया। सीएचसी के फार्मासिस्ट अनिल अवस्थी ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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Lockdown Agra: गैस सिलिंडर आपूर्ति के 15 दिन बाद ही होगी बुकिंग, नया नियम लागू

कोरोना इफेक्ट: 30 मार्च से शुरू होगी 345 कैदियों को छोड़ने की प्रक्रिया

कोविड 19 कोरोना वायरस की वजह से नैनी सेंट्रल जेल से करीब 345 और रेंज स्तर से करीब 1100 कैदियों को छोडने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो जाएगी। नैनी सेंट्रल जेल के सात साल की सजा पाने वाले तीन कैदियों की सजा एक हफ्ते से लेकर 15 दिन में पूरी होने वाली है, इसलिए उन कैदियों ने पैरोल पर जाने से मना कर दिया है। दूसरी तरफ 14 वर्ष की सजा पाए 60 साल से ऊपर के 69 बंदियों के बारे में शासन और समिति की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। जिससे उनके पैरोल की उम्मीद धूमिल हो गई है। 

गौरतलब है कि कोविड 19 कोरोना वायरस के संक्रमण से जेल के कैदियों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सात साल की सजा पाने वाले और इतनी ही समयावधि की धाराओं ने निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के साथ 14 साल की सजा पाए 60 साल से ऊपर के बंदियों को जमानत और पैरोल पर छोडने का निर्देश दिया था। शासन के आदेश पर नैनी सेंट्रल जेल से सात साल की सजा पाने वाले 48 सजायाफ्ता बंदियों, सात साल तक की सजाओं में निरुद्ध 300 विचाराधीन कैदियों और 14 साल की सजा पाए 60 साल से अधिक 69 बंदियों को मिलाकर कुल 417 की लिस्ट शासन को भेजी गई थी।

जिस पर शनिवार को प्रदेश की कारागार समिति की ओर से निर्देश आ गया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने बताया कि 69 में से एक की 28 मार्च को रिहाई हो गई है। डीआईजी जेल बीआर वर्मा ने बताया कि पूरे रेंज की आठ जेलों से करीब 1100 कैदी एवं बंदियों को जमानत व पैरोल दी जाएगी। 14 साल की सजा पाने वाले बंदियों के बारे में कोई निर्देश नहीं आया है। रिहाई की प्रक्रिया सोमवार से शुरू होगी। 
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कार्रवाई के बाद भी नहीं मान रहे लोग, 15 और मामले दर्ज

कोरोना संकट के लगातार बढ़ते हुए खतरे के बावजूद लोग लॉक डाउन को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसे मामलों को लेकर पुलिस भी बेहद सख्त है और वह लगातार लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई भी कर रही है। इसी के तहत जिले के अलग-अलग थानों में कुल 15 मामले दर्ज किए गए हैं। 

लॉक डाउन के मद्देनजर कुल 185 नाकों व चौराहों पर चेकिंग की गई। इस दौरान 132 लोग ऐसे मिले जो बेवजह घर से बाहर घूम रहे थे। जिसके बाद इन लोगों पर धारा 144 के उल्लंघन व महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। ये मुकदमे खुल्दाबाद, शाहगंज, कीडगंज, नवाबगंज, सराय इनायत, मांडा, खीरी, घूरपुर व शंकरगढ़ में दर्ज किए गए। यही नहीं कुल 6023 वाहनों की जांच की गई, जिनसे 11300 रुपये का जुर्माना वसूला गया। 798 वाहनों का चालान भी किया गया।
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