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जिले का सबसे बड़ा आश्रयस्थल बना भजनपुर जीआईसी

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Mon, 30 Mar 2020 07:39 PM IST
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बनबसा पूर्णागिरि इंटर कालेज में क्वारंटीन किए गए मजदूर।
बनबसा पूर्णागिरि इंटर कालेज में क्वारंटीन किए गए मजदूर। - फोटो : TANAKPUR
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चंपावत/बनबसा। रामदत्त, बच्चू, अंबा, होरी, मोहन, अंबिका, माया सहित 401 खनन मजदूर और अन्य श्रमिक बनबसा के पास भजनपुर इंटर कॉलेज में रविवार से रात काट रहे हैं। कोरोना वायरस के खतरों के बीच दो हॉलों सहित 18 कमरों वाला यह केंद्र मजदूरों के लिए जिले का सबसे बड़ा आश्रयस्थल बन गया है। इन श्रमिकों के लिए 6 भोजनमाता खाना बना रहीं हैं। मजदूरों का कहना है कि यहां उन्हें भोजन तो भरपेट मिल रहा है, मगर काम के बगैर उन्हें दिन काटना दूभर हो रहा है।
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चल्थी, चंपावत और टनकपुर क्षेत्र के 400 से अधिक श्रमिकों ने बीते चार दिनों में अपने घरों को जाने की कोशिश की। मजदूरों का कहना है कि पल्ले में पैसा नहीं होने से उन्होंने यहां भूख और अन्य दिक्कत से बचने के लिए पैदल आगे बढ़ने की सोची, लेकिन उन्हें घर जाते वक्त बनबसा में रोक लिया गया। अलग-अलग जत्थों से रविवार शाम तक बनबसा पहुंचे मजदूरों की पूरी व्यवस्था भजनपुर जीआईसी में कर दी गई। प्रधानाचार्य आईडी तिवारी बताते हैं कि मजदूरों के लिए दोनों वक्त के खाने की व्यवस्था भोजनमाताओं के जरिये की गई है। छोटे बच्चों के लिए सोमवार से दूध का प्रबंध भी किया गया है।
मजदूरों के लिए आसरा बना देवीधुरा बाराही धाम
12 मजदूरों के खाने, रहने का किया गया इंतजाम
चंपावत। मां बाराही धाम देवीधुरा के कपाट इस बार नवरात्र में बंद हैं, लेकिन ये धाम मजदूरों के लिए आश्रयस्थल बना है। बिहार और हरिद्वार के 12 मजदूरों के लिए यहां खाने व रहने की व्यवस्था की गई है। शिक्षक डॉ. विपिन चंद्र जोशी अपनी ओर से 15 किलो आटा, चावल, 3 किलो दाल, 3 किलो नमक, 1.5 किलो तेल सहित जरूरी सामग्री की हर रोज व्यवस्था कर रहे हैं। डॉ. जोशी इन मजदूरों को दूर-दूर रहने सहित कोरोना वायरस से बचाव के तरीके भी बता रहे हैं। धाम की ओर से किए गए आग्रह को मानते हुए इन मजदूरों ने अब आगे न जाकर लॉकडाउन तक यहीं रुकने की बात कही है।
पहाड़ से पैदल पहुंचे 40 यात्री टनकपुर में फंसे, जीजीआईसी में ठहराया
टनकपुर (चंपावत)। कोरोना के चलते सीमाएं सील किए जाने से साधन के अभाव में परिवार और बच्चों के साथ पैदल ही गंतव्य को रवाना हुए यात्री रास्तों में फंस गए हैं। सोमवार को पहाड़ से मैदान पहुंचे करीब 40 यात्री टनकपुर में फंसे हैं। प्रशासन ने ऐसे यात्रियों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था की है। तहसीलदार खुशबू पांडेय ने बताया क्षेत्र में फंसे यात्री, गरीब और असहाय लोगों के लिए किचन खोला गया है। जहां मुफ्त में खाना खिलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोजन के साथ ही राजकीय बालिका इंटर कॉलेज भवन में रहने की भी व्यवस्था की गई है। उधर, बनबसा सीमा पर पहाड़ जाने के लिए पहुंचे 150 यात्रियों को टनकपुर में रहने और खाने की व्यवस्था की गई।
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