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चंपावत के सबसे बडे़ अस्पताल में छोटे बच्चे के बुखार नापने को थर्मामीटर नहीं

Amarujala Local Bureauअमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Wed, 01 Apr 2020 03:59 PM IST
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पिता की गोदी में मासूम बच्चा अंश।
पिता की गोदी में मासूम बच्चा अंश। - फोटो : AMAR UJALA
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अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। जिले के सबसे बड़े अस्पताल (चंपावत जिला अस्पताल) में बच्चों के बुखार नापने को थर्मामीटर तक नहीं है। सरकारी अस्पताल से मायूस लौटने के बाद मंगलवार को 22 माह के शिशु का इलाज एक निजी अस्पताल में कराया गया। पिता के मुताबिक इलाज के बाद अब बच्चे की तबियत ठीक है। उन्होंने अमर उजाला को बुधवार को फोन कर आपबीती सुनाई। यहां से सात किमी दूर मौराड़ी गांव के प्रकाश जोशी बेटे अंश जोशी (22 माह) को बुखार होने पर सुबह करीब 11.20 बजे जिला अस्पताल आए। पिता का कहना है कि आपात सेवा में देखने के बाद खांसी-जुकाम व बुखार के इलाज के लिए बने काउंटर में भेज दिया गया, जहां उस वक्त कुछ लोगों की लाइन लगी हुई थी, उनमें से ज्यादातर लोग बाहर से आए थे। उन्होंने संक्रमण के डर से बाहर वाले काउंटर से इलाज करने से इंकार कर दिया। उन्होंने बच्चे का बुखार आपात कक्ष में नापने को कहा, जिस पर मना करने पर वे निजी अस्पताल में गए तो वहां के स्टाफ ने ओपीडी में इलाज नहीं होने की बात कही। इसके बाद वे सीधे एक छोटे निजी क्लीनिक गए जहां बुखार नापने के बाद जरूरी दवाएं दी गइं। पिता का कहना है कि इस इलाज के बाद बुधवार को बच्चे की तबियत में सुधार है। कोट इमरजेंसी में निशुल्क इलाज की व्यवस्था है। मगर जिस वक्त नन्हे बच्चे को बुखार के इलाज के लिए लाया गया था, उस समय ४-हैड (नॉन कांटेक्ट इंफ्रारेड) थर्मामीटर को किन्हीं अन्य लोगों के बुखार को नापने के लिए ले जाया गय था। मंगलवार दुपहर बाद 4-हैड के तीन और थर्मामीटर अस्पताल को मिल गए हैं। अब इमरजेंसी में बुखार नापने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। डॉ. आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, चंपावत।
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