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गुजरात के यात्री तो भिजवा दिए हमारी भी सुध लो सरकार

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Sat, 28 Mar 2020 08:57 PM IST
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हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे पर से घर जाते लोग ।
हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे पर से घर जाते लोग । - फोटो : HARIDWAR
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लॉकडाउन के चलते हरिद्वार में कई राज्यों के हजारों श्रद्धालु अब भी फंसे हुए हैं। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने गुजरात के करीब 1500 यात्रियों को विशेष अनुमति देकर बीती शाम हरिद्वार से रवाना कराया था। इससे यहां फंसे अन्य लोगों को भी यह उम्मीद जगी थी कि अब प्रशासन उनके लिए भी कोई रास्ता निकालेगा, लेकिन प्रशासन ने शनिवार को इस बारे में कोई पहल नहीं की।
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हरिद्वार में बिहार के कई जिलों की मजदूर फंसे हुए हैं। पांच महीने से ऊर्जा निगम के भूमिगत विद्युतीकरण का कार्य कर रहे बिहार के पूर्णिया और अरिया जिले के करीब 100 मजदूर एक सप्ताह से बिना कामकाज के ऋषिकुल विद्यापीठ के मैदान में पड़े हैं। यह मजदूर वापस अपने घरों को लौटना चाहते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते वाहनों की आवाजाही बंद होने के कारण वह फंस गए हैं। मजदूर सरवर, अकरम आदि ने बताया कि उन्होंने राही मोटल में पास बना रहे अधिकारी से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वाहन का प्रबंध करो पास हम बना देंगे। उन्होंने कुछ ड्राइवरों से बात की तो उन्होंने प्रति व्यक्ति 3000 रुपये किराया मांगा। मजदूरों का कहना है कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। हालांकि इन मजदूरों के लिए राशन की व्यवस्था करा दी गई है और खाने की समस्या का समाधान हो गया है।
इसी तरह मिदनापुर पश्चिम बंगाल से यात्रा पर आए 17 यात्रियों का एक ग्रुप श्रवणनाथ नगर स्थित एक होटल में 18 मार्च से रुका हुआ है। जिस दिन इन्हें वापस जाना था, उसी दिन लॉकडाउन की घोषणा हो गई। यात्री कृष्णदास और चंद्रकांत मैती ने बताया कि लॉकडाउन के कारण वह हरिद्वार में फंस गए हैं। वह भी वापस घर जाना चाहते हैं। इसके लिए उत्तराखंड सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। विष्णु घाट के आसपास कई होटलों में पश्चिम बंगाल के करीब 500 यात्री ठहरे हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा और व्यापारी नेता डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि इन यात्रियों को भी गुजरात के यात्रियों की तरह ही वापस भेजने की अपील प्रशासन से दिनभर की जाती रही, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकाला गया। एचआरडीए के सचिव हरवीर सिंह ने बताया कि सभी यात्रियों को राशन उपलब्ध करा दिया गया है।
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सिटी मजिस्ट्रेट दफ्तर के बाहर दिनभर बैठे रहे मजदूर
हरिद्वार। सिडकुल में काम करने वाले बरेली और शाहजहांपुर के करीब 20 यात्री दिनभर नगर मजिस्ट्रेट के कार्यालय के बाहर इस उम्मीद में बैठे रहे कि उनकी भी कोई सुध लेगा। ये सभी कर्मचारी सिडकुल की फैक्टरियों में काम करते हैं। उन्होंने मीडियाकर्मियों से भी मदद मांगी, लेकिन किसी अधिकारी ने यह बताने तक की जहमत नहीं उठाई कि क्या कोई अधिकारी ऐसी अनुमति आज भी दे रहा है या नहीं। इन मजदूरों की पीड़ा की वीडियो सीधे डीएम सी रविशंकर की ओर से बनवाए गए मीडिया सुझाव वाले व्हाट्सएप ग्रुप पर भी डाली गई। सभी अधिकारियों ने इस बारे में सारे कमेंट्स देखने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। बाद में कुछ पत्रकारों ने उनके लिए भोजन की व्यवस्था कराई। हताश कर्मचारियों ने बाद में पैदल चंडी घाट पहुंचकर आसरा लिया। यहां उन्हें दो ट्रक वालों ने बैठाकर यूपी बॉर्डर तक छोड़ा।
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