नैनीताल के होटल व्यवसाय को 25 करोड़ से अधिक का नुकसान

Amarujala Local Bureauअमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Wed, 01 Apr 2020 05:58 PM IST
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चंद्रेश पांडे नैनीताल। कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद से जहां पूरी दुनिया भयभीत है वहीं दूसरी ओर इस वायरस ने नैनीताल के पर्यटन व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। 21 दिन के लॉकडाउन अवधि में अकेले होटल उद्योग को 25 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, वहीं सैकडों लोगों की रोजीरोटी भी छिन गई है। अप्रैल शुरू होते ही नैनीताल में पर्यटन की तरह तैयारियां परवान चढ़ने लगती हैं। पर्यटन से जुड़े छोटे से बड़े व्यक्ति हर कोई व्यस्त नजर आते हैं लेकिन इस बार नौका चालकों से लेकर बड़े-बड़े होटल व्यवसायी तक आजकल अपने घरों में कैद हैं। नैनीताल के होटल उद्योग की बात करें तो यहां लगभग चार सौ छोटे बड़े होटल है इनमें से 160 के करीब होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन से पंजीकृत हैं। नैनीताल में पर्यटक सीजन शुरू होते वक्त औसतन होटलों के कमरे का किराया 15 ₹100 तक होता है जबकि उच्च स्तरीय होटलों में यही यही किराया प्रति कमरा 8 से ₹10000 तक भी रहता है। यूं तो कई बड़े होटलों में 40 से 45 कमरे भी हैं मगर हम प्रति होटल यदि 20 कमरों का औसत भी लें तो नगर के 400 होटलों में 8000 कमरे होते हैं और यदि एक कमरे का किराया कम से कम पंद्रह सौ रुपया हो तो 8000 कमरों का किराया एक करोड़ 20 लाख रुपया होता है। अब 21 दिनों में यही किराया बढ़ कर 25 करोड़ 20 लाख रुपए हो जाता है यदि इस अवधि में लॉकडाउन नहीं हुआ होता और व्यवस्थाएं पहले की तरह ही चलती रहती तो होटल उद्योग को इन 21 दिनों में 25 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त होता। लॉकडाउन के चलते होटलों के बंद होने से इस बार नैनीताल के होटल उद्योग को सीजन के शुरुआत में ही 25 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह का है कि यह नुकसान 25 करोड़ से कहीं अधिक का है और इसकी भरपाई तभी संभव है जब केंद्र अथवा प्रदेश सरकार होटल उद्योग के लिए विशेष नीति लेकर आए और होटल व्यवसायियों से वसूले जाने वाले करों को शत प्रतिशत माफ करें जैसा कि देश के कई अन्य राज्यों ने किया है। इनसेट नैनीताल और इसके आसपास के क्षेत्रों में कई लोगों ने होटल और गेस्ट हाउस लीज पर लिए गए हैं जबकि कई लोगों ने बैंकों से ऋण लेकर होटल व्यवसाय शुरू किया है अब नुकसान के बीच अब ऐसे होटल व्यवसायियों के सामने लीज पर लिए गए होटल का किराया देने अथवा बैंक से लिए गए ऋण की किस्त देने का संकट खड़ा हो गया है इसे लेकर भी होटल व्यवसायी खासे परेशान हैं।
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