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Lockdown In Uttarakhand Live Updates : क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड देगा पीएम राहत कोष में 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

कोरोना वायरस को लेकर उत्तराखंड में लॉकडाउन आज भी जारी है। सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात है।

29 मार्च 2020

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ऋषिकेश

रविवार, 29 मार्च 2020

कोरोना: एम्स ऋषिकेश में छात्रों के विरोध के बाद देर रात माना प्रशासन, चार अप्रैल तक कक्षाएं सस्पेंड

कोरोना वायरस से दहशत में आए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मेडिकल छात्रों ने कक्षाओं को सस्पेंड करने और छुट्टी के लिए बृहस्पतिवार को फिर हंगामा किया। दिनभर हंगामे के बीच उनकी प्रबंधन से कई दौर की वार्ता हुई। अंतत: देर शाम डीन (एकेडमिक) प्रो. मनोज गुप्ता ने चार अप्रैल तक कक्षाएं सस्पेंड करते हुए पांच बिंदुओं का ऑफिस आर्डर जारी किया जिसमें हॉस्टल में रह रहे छात्रों को पर्याप्त सुरक्षा के साथ घर जाने के कहा गया। साथ ही उनकी कक्षाएं अगले आदेशों तक सस्पेंड कर दी। उन्होंने स्पष्ट किया कैंपस में रुकने के इच्छुक छात्रों को अपने अभिभावक से लिखित में सहमति पत्र देना होगा। साथ ही हॉस्टल में रहने वाले छात्र कैंपस से बाहर नहीं जा सकेंगे।

बुधवार देर रात्रि कक्षाएं रद्द किए जाने मांग को लेकर मेडिकल छात्र एम्स परिसर में धरने पर बैठ गए थे। बृहस्पतिवार दोपहर में करीब 250 से अधिक छात्र एकेडमिक ब्लाक में जुटे और एम्स निदेशक से वार्ता की मांग करने लगे। देर शाम तक जब छात्रों को वाजिफ जवाब नहीं मिला तो कैंपस में आ गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद देर शाम 7.30 बजे छात्र एम्स निदेशक प्रो. रविकांत के आवास के बारह एकत्र हो गए। वे एम्स निदेशक से बात करना चाहते थे। छात्र जब नारेबाजी करने लगे तो निदेशक ने डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता और डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. सौरभ वाष्र्णेय को छात्रों से बातचीत के लिए भेजा। देर शाम प्रबंधन ने छात्रों की मांगें मान लीं और पांच बिंदुओं पर ऑफिस ऑर्डर जारी कर दिया।

मौजूदा समय में हम स्वास्थ्य जंग लड़ रहे हैं। इस जंग को जितने के लिए हमें सिर्फ डॉक्टर नहीं, मेडिकल स्टूडेंट, स्टॉफ चाहिए ट्रेंड लोग चाहिए। मेडिकल स्टूडेंट हमारा बैकअप हैं। ऐसे में इस समय कोरोना से जंग लड़ने के लिए पूरा उत्तराखंड ऋषिकेश एम्स की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। तब हमारी जिम्मेदारी बन जाती है कि हम लोगों की अकांक्षाओं पर खरा उतरें। सब मेडिकल स्टूडेंट घर चले जाएंगे तो हम इस जंग को कैसे जीत पाएंगे। छात्रों को भी इस विषय में सोचना चाहिए। वे यहां पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- प्रो. रविकांत, निदेशक, एम्स
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कोरोना की दहशत के बीच बसों या ट्रेनों में सैनेटाइजर का उपयोग करते वक्त रहें सावधान

सावधान आजकल यदि आप सफर कर रहे हों तो बसों या ट्रेनों में सैनेटाइजर का छिड़काव कर जहरखुरानी आपको शिकार बना सकते हैं। बुधवार को ऋषिकेश डिपो में तैनात परिवहन निगम का एक ड्राइवर भी इस गिरोह का शिकार हो गया। ड्राइवर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटनाक्रम के अनुसार बुधवार सुबह एक व्यक्ति हरिद्वार से ऋषिकेश के लिए रोडवेज बस में बैठा। ऋषिकेश पहुंचने के बाद भी वह होश में नहीं आया। सवारियों के उतरने के बाद परिचालक ने उक्त युवक को सीट पर बेहोश पाया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने बेहोश युवक को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया।

दोपहर बाद होश में आने पर युवक ने अपना नाम भीष्म (40) पुत्र महेंद्र निवासी लक्सर हरिद्वार बताया। कहा कि वह ऋषिकेश डिपो में ही ड्राइवर के पद पर तैनात है। सुबह बस से आते समय पास बैठे एक व्यक्ति ने हाथ साफ करने के लिए सैनेटाइजर का छिड़काव किया। उसके बाद उसको कुछ याद नहीं रहा।
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स्टाफ नर्स ने पेश की इमानदारी की मिसाल

राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश के ब्लड बैंक में तैनात स्टाफ नर्स ज्योत्सना थपलियाल ने एक महिला का पर्स लौटा कर ईमानदारी की मिसाल पेश की है। वहीं, महिला ने अपना खोया हुआ पर्स पाकर नर्स को धन्यवाद देकर प्रशंसा की है।
बुधवार को बछेलीखाल, जिला टिहरी की रहने वाली महिला मनोरमा रावत अपनी वृद्ध सास का इलाज करवाने के लिए देहरादून रोड स्थित एसपीएस राजकीय चिकित्सालय पहुंची। यहां चिकित्सक ने उनकी सास को भर्ती कर खून चढ़ाने के लिए कहा। महिला ने ब्लड बैंक में रक्तदान किया और वहां से रक्त लेकर चली गई। इसके बाद ब्लड बैंक में तैनात स्टॉफ नर्स ज्योत्सना की नजर कुर्सी में पड़े पर्स पर पड़ी। नर्स ने पर्स खोलकर देखा तो उसमें रुपये और जरूरी कागजात मिले। उन्होंने काफी देर तक महिला का इंतजार किया। आखिरकार नर्स ने महिला को ढूंढ़कर उनका पर्स लौटाया। स्टॉफ नर्स की इस ईमानदारी पर ब्लड बैंक प्रभारी डा. मुकेश कुमार पांडे ने भी सराहना की। वहीं, महिला ने बताया कि उसे पर्स की याद ही नहीं थी। मगर स्टॉफ नर्स की ईमानदारी तारीफ के काबिल है।
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उत्तराखंड लॉकडाउन: जौलीग्रांट एयरपोर्ट से हवाई सेवा बंद, केवल इमरजेंसी फ्लाइट के लिए खुला रहेगा एयरपोर्ट

देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट देर रात से पैसेंजर फ्लाईटों की आवाजाही के लिए बंद हो जाएगा। लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों के लिए एयरपोर्ट को खुला रखा जा रहा है। बताया गया कि आगामी 31 मार्च तक एयरपोर्ट पर कामर्शियल फ्लाईटों को बंद रखा जा रहा है।

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण राज्य के सबसे बड़े देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर देर रात से पैसेजंर फ्लाईटों की आवाजाही को बंद कर दिया गया। गौरतलब है कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट देश के विभिन्न 11 शहरों जिनमें दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, हैदराबाद, बंगलुरू,लखनऊ, बनारस और कोलकाता आदि की हवाईसेवाओं से जुड़ा हुआ है।

प्रतिदिन 22 कमर्शियल फ्लाईटों के विमान उड़ते और उतरते है। गौरतलब है कि मार्च माह से करीब छह फ्लाईटों में बढ़ोतरी होने की तैयारियां भी हो चुकी थी। कोरोना वायरस के हवाईसेवाओं में गिरावट दर्ज होने लगी थी। हालांकि जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए प्रभावी व्यवस्थाओं को रखा जा रहा था।
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Coronavirus in Uttarakhand: एम्स ऋषिकेश और आईआईपी में होगी सैंपल की जांच, रिपोर्ट आने में नहीं लगेगा ज्यादा समय

जानलेवा कोरोना वायरस की जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून में लैब स्थापित की जाएगी। इसके लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

प्रदेश में कोरोना वायरस की जांच के लिए केंद्र सरकार ने मेडिकल कालेज हल्द्वानी को सैंपल जांच की मान्यता दी है। इसके अलावा प्राइवेट और न ही किसी अन्य सरकारी अस्पतालों की लैब में कोरोना सैंपल की जांच की जा सकती है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रतिदिन सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

लेकिन सैंपलों की जांच रिपोर्ट में चार से पांच दिन का समय लग रहा है। सरकार ने सैंपल जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एम्स ऋषिकेश, आईआईपी में लैब स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही महंत इंद्रेश अस्पताल, आहूजा पैथोलॉजी लैब में भी सैंपल जांच सुविधा के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
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कोरोना महामारी: जरूरी काम वालों को ही दी जाने की अनुमति, दैनिक मजदूरों पर आर्थिक संकट

कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से लॉकडाउन किए जाने के फैसले को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह के समय असमंजस की स्थिति रही। घरों से बाहर निकल रहे लोगों को लॉकडाउन के हवाला देकर जागरूक किया।

इस दौरान एयरपोर्ट, अस्पताल, जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को छोडकर अन्य गैर जरूरी वाहनों को देहरादून या ऋषिकेश नहीं जाने दिया। थानाध्यक्ष हेमंत खंडूरी ने बताया कि गैर जरूरी वाहनों पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह बंद है। जरूरी और आवश्यक सेवा वाले वाहनों को पूछताछ के बाद जाने दिया जा रहा है।

बाहरी राज्यों से आकर मजदूरी करने वाले मजदूरों के सामने कोरोना वायरस ने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया। किराये के कमरों में रह रहे प्रतिष्ठानों, होटल कर्मी, मजदूरों को पहले जनता कर्फ्यू और अब लॉकडाउन के चलते कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जिससे दैनिक मजदूर तबका घरों में कैद होकर रह गया है।

भारी संख्या में बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड राज्य से मजदूरी करने मजदूर आते हैं, जो अब लॉकडाउन के चलते न तो वापस अपने घर जा सकते है और नहीं काम कर सकते है। प्रतिष्ठानों के स्वामियों ने बंदी का हवाला देकर के कर्मियों को घर भेजना शूरू कर दिया है। वहीं निर्माण कार्यो पर लगी रोक से मजदूरों के सामने भी भारी आर्थिक संकट खंडा हो गया।
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अफवाह न फैलाएं, यथासंभव लोगों की मदद करें

सांकेतिक तस्वीर
कोरोना की दहशत के बीच अफवाहों का बाजार भी गर्म है। खासकर सोशल मीडिया पर लोग भांति-भांति की अफवाहें फैलाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। ऐसे में जागरूक लोगों का फर्ज बनता है कि वे इन अफवाहों पर लगाम लगाने में अपनी भूमिका निभाएं। ऋषिकेश कोतवाली पुलिस ने अफवाहें फैलाने वाले अराजक लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है। कोतवाली प्रभारी रितेश शाह का कहना है कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से ऐसी शिकायतों मिल रही हैं। ऐसे लोगों पर पुलिस बराबर नजर रख रही है। पुलिस ऐसे लोगों को चिहिन्त कर कड़ी कार्रवाई करेगी। शाह का कहना है कि कोरोना के खिलाफ विश्वव्यापी जंग लड़ी जा रही है, जिसमें हर व्यक्ति अपने-अपने ढंग से जिम्मेदारी निभानी चाहिए न कि भ्रामक अफवाहें फैलानी चाहिए।
संकटकाल में करें जरूरतमंदों की मदद
31 मार्च तक समूचा उत्तराखंड ‘लॉकडाउन’ किया गया है। सामान्य तौर पर सभी नागरिक एक-दूसरे से सीधे संपर्क से कट गए हैं। ऐसे में बतौर जागरूक नागरिक आपका-हमारा अपनी पेशेगत भूमिकाओं से इतर यह सामाजिक दायित्व भी बनता है कि हम इस ‘संकटकाल’ अपने आसपास उन लोगों की किसी भी रूप में मदद कर सकें, जिन्हें इसकी आवश्यकता हो। इनमें हमारे समाज के बुजुर्ग, बच्चे, सामाजिक-आर्थिक तौर पर कमजोर और वंचित लोग, अर्थात कोई भी हो सकता है।
क्या कर सकते हैं आप
1- अपने आसपास सजग नजर रखना और अफवाहों के खिलाफ लोगों को जागरूक करना।
2- अपने आसपास किसी भी वृद्ध को मेडिकल हेल्प, दवा अथवा अन्य आवश्यक वस्तु की आवश्यकता होने पर स्वयं अथवा संबंधित क्षेत्र की पुलिस व प्रशासनिक स्तर से मदद पहुंचवाना।
3- अपने आसपास किसी ऐसे बेहद जरूरतमंद परिवार को स्वयंसेवी संस्था अथवा सरकारी एजेंसी के माध्यम से मदद पहुंचवाना, जो काम न होने के कारण आर्थिक संकट से जूझते हुए भोजन की व्यवस्था तक न कर पा रहा हो।
4- कहीं आवश्यक वस्तुओं-दवाओं की कालाबाजारी, जमाखोरी आदि की जानकारी मिलने पर उसके आपस में शेयर करते हुए जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसी तक पहुंचाना।
5- अपने आसपास किसी समस्या के उत्पन्न होने पर उसे मीडिया तक पहुंचाकर उजागर करने में मदद करना।
6- मोटे तौर पर इनके अतिरिक्त भी जो कुछ किया जा सकता है, वह इस ग्रुप में शेयर करके जोड़ा जा सकता है।
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लॉकडाउन : पहले दिन बीटीसी में पहाड़ जाने वालों की उमड़ी भीड़

बीते दिन प्रदेश मेें लॉकडाउन घोषित होने के बाद इसका असर सोमवार को यात्रा बस स्टैंड में भी देखने को मिला। आलम यह रहा कि बड़ी संख्या में पहाड़ी रूटों पर जाने वाले लोग बस ट्रांजिट कंपाउंड में उमड़ पड़े। मगर यहां वाहनों की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण लोगों में आक्रोश फैल गया। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने यहां स्थित चौकी का घेराव कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख तहसीलदार ने स्वयं मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। इस दौरान उन्होंने राजस्व व पुलिस कर्मियों की सहायता से स्थिति को नियंत्रण में किया और सभी लोगों के लिए वाहनों की व्यवस्था की। देर शाम तक मौके पर उपस्थित अधिकांश लोगों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उनके गंतव्यों की ओर रवाना किया गया।
देशभर में जनता कर्फ्यू के अगले दिन सोमवार सुबह को बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों मेें कार्यरत पहाड़ी मूल चमोली, रुद्र्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी आदि जगहों के लोग अपने गंतव्यों मेें रवाना होने के लिए तीर्थनगरी के यात्रा बस स्टैंड पहुंचे। मगर यहां बसें आदि सेवाएं उपलब्ध न होने के कारण लोगों का पारा चढ़ गया। हालात यह रहे कि देखते ही देखते इन लोगों की भीड़ ने बीटीसी में विकराल रूप धारण कर लिया और यह जनसंख्या 15 सौ के पार जा पहुंची। इसकी सूचना मौके पर उपस्थित पुलिस कर्मियों ने तत्काल तहसीलदार रेखा आर्य को दी। तत्काल मौके पर पहुंची तहसीलदार ने प्रशासन और पुलिसकर्मियों के संग मिलकर मोर्चा संभाला। इस दौरान उन्होंने सभी को जिले के हिसाब से क्रमवार खड़े होने के निर्देश दिए। इसके बाद तहसीलदार के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन के कर्मियों ने मौके पर उपस्थित सभी लोगों के जिलेवार नाम और पते की जानकारी एकत्र की। इसके बाद मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी प्रेमलाल ने परिवहन कर अधिकारी पंकज श्रीवास्तव और रोडवेज एजीएम पीके भारती को पहाड़ी रूटों के लिए वाहनों की उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। जिस पर परिवहन निगम की ओर से पांच बसें और परिवहन कंपनियों की 10 बसें समेत 20 सूमो वाहन का इंतजाम किया गया।
आखिरकार मौके पर पहुंची आयुष विभाग विभाग देहरादून की टीम डॉ. लक्ष्मण सिंह राणा, डॉ. सुचिता गिरी, फार्मेसिस्ट मुनेंद्रे मेहर, फार्मासिस्ट उमाशंकर प्रजापति, होम्योपैथी फार्मसिस्ट अमृता ने दोपहर बाद पहाड़ी रूटों पर जाने वाले सभी लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू की व हाथों में मोहर लगाकर देर शाम तक अधिकांश लोगों को उनके गंतव्यों की ओर रवाना किया। इस अवसर पर एसएनए एलम दास, पुलिस उपनिरीक्षक ओमकांत भूषण, शिव प्रसाद डबराल, राजस्व निरीक्षक सतीश जोशी, कांस्टेबल शंकर बिजल्वाण, गब्बर सिंह आदि उपस्थित थे।
बसों को सैनिटाइज और स्टीकर लगाकर किया रवाना
बीटीसी में फंसे पहाड़ी मूल के लोगों के लिए प्रशासन ने बसों और अन्य वाहनों का इंतजाम किया गया। खास बात यह रही कि इस दौरान पहले सभी वाहनों को सेनेटाइज की किया गया। उसके बाद ही इन वाहनों को गंतव्यों की ओर रवाना किया गया। इस दौरान वाहनों के आगे उनके गंतव्यों के नाम का स्टीकर भी लगाया गया। साथ ही प्रशासन की ओर से मार्ग में अन्य बाधाओं को दूर करने के लिए चालक को पत्र भी दिया गया।
धूप में खड़ी सवारियों को प्रशासन ने दिया खाने का सामान
सोमवार को लॉक डाउन के पहले दिन बीटीसी में खड़े लोगों के लिए प्रशासन ने खाने के लिए बिस्कुट आदि का इंतजाम भी किया। इस दौरान तहसीलदार रेेखा आर्य से मौके पर उपस्थित समस्त लोगों को बिस्कुट बांटे।
अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
सोमवार को बीटीसी कंपाउंड में कुछ तहसीलदार को कुछ लोग कोरोना और भीड़ के संबंध में अफवाह फैलाते हुए नजर आए। यह सुन तहसीलदार रेखा आर्य का पारा चढ़ गया। उन्होंने तत्काल पुलिसकर्मियों को अफवाहें फैलाने वालों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। बाद में माफी मांगने पर उन्होंने अफवाह फैलाने वाले को सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया।
तीन घंटे लेट पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार को सुबह उपजिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह 11 बजे तक बीटीसी में नहीं पहुंच पाई। इस दौरान उपजिलाधिकारी प्रेमलाल ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के समक्ष लापरवाही बरतने पर नाराजगी भी जताई।
बस अड्डे पर तैनात परिवहन विभाग और पुलिस की टीम।
बस अड्डे पर तैनात परिवहन विभाग और पुलिस की टीम।- फोटो : RISHIKESH
राजकीय चिकित्सालय की एंबुलेंस को सेनेटराइज करता निगमकर्मी।
राजकीय चिकित्सालय की एंबुलेंस को सेनेटराइज करता निगमकर्मी।- फोटो : RISHIKESH
दोपहर 12 बजे देहरादून मार्ग स्थित मेडिकल स्टोर पर आवश्यक सेवा के उमड़ी भीड़।
दोपहर 12 बजे देहरादून मार्ग स्थित मेडिकल स्टोर पर आवश्यक सेवा के उमड़ी भीड़।- फोटो : RISHIKESH
हाईवे पर वाहनों की चेकिंग कर उन्हें निर्देश देते पुलिस कर्मी।
हाईवे पर वाहनों की चेकिंग कर उन्हें निर्देश देते पुलिस कर्मी।- फोटो : RISHIKESH
बस अड्डे पर पहाड़ी रूटों पर जाने वालों की लगी भीड़।
बस अड्डे पर पहाड़ी रूटों पर जाने वालों की लगी भीड़।- फोटो : RISHIKESH
बस अड्डे पर पहाड़ी रूटों पर जाने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग करता स्वास्थ्य कर्मी।
बस अड्डे पर पहाड़ी रूटों पर जाने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग करता स्वास्थ्य कर्मी।- फोटो : RISHIKESH
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कोरोना वायरस: तीर्थनगरी में जनता कर्फ्यू रहा सफल

कोरोना के आतंक के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में जनता कर्फ्यू सफल नजर आया। इस दौरान सभी मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा। खास बात यह रही कि बिना पुलिस दबाव के लोग स्वत: ही घरों में ही रहे।
कोरोना के संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से रविवार 22 मार्च के दिन स्वत: जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की थी। रविवार को इसी क्रम में तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने सुबह सात से रात नौ बजे तक घरों में ही रहकर जनता कर्फ्यू को समर्थन दिया। इसके साथ सूमो यूनियन, ऑटो यूनियन, गढ़वाल टैक्सी एसोसिएशन, विक्रम यूनियन एवं परिवहन कंपनियों ने भी जनता कर्फ्यू को अपना समर्थन दिया और वाहनों के संचालन पूर्ण रूप से बंद रखा। इस कारण सुबह से ही हरिद्वार रोड, वीरभद्र मार्ग, आईडीपीएल, पुरानी चुंगी, बाईपास मार्ग, तिलक मार्ग, घाट रोड, रेलवे रोड, देहरादून रोड, क्षेत्र रोड, झंडा चौक, बनखंडी, चंद्रभागा, इंद्रमणि बडोनी चौक, लक्ष्मणझूला रोड, ढालवाला बाईपास मार्ग, तपोवन, चौदह बीघा मार्ग, शीशम झाड़ी मार्ग, रामझूला, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आदि जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा। इस बीच शहर में कुछ आश्रमों व घरों मेें शाम पांच बजे लोगों ने बड़ी संख्या में थाली, घंटी और तालियां भी बजाई। कुछ जगहों पर आवश्यक कार्य पड़ने पर ही लोग अपने निजी वाहनों से जाते हुए नजर आए।
हर जगह चौकन्ना रहा प्रशासन
ऋषिकेश। जनता कर्फ्यू के बावजूद विभिन्न राज्यों से बीटीसी पहुंचे 19 लोगों को तहसीलदार ने थर्मल स्क्रीनिंग के लिए एम्स भेजा। जनता कर्फ्यू के दौरान ऋषिकेश में एक ओर जहां प्रशासन की टीम चौकस नजर आई, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक लापरवाह बनी हुई है। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में अब तक कोई थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। हालात यह रहे कि रविवार को बंस ट्रांजिट कंपाउंड में विभिन्न राज्यों से आये पहाड़ी मूल के 19 लोगों को थर्मल टेस्ट के लिए मजबूरन एम्स में भेजना पड़ा।
19 युवकों का एम्स में स्क्रीनिंग टेस्ट कराकर भेजा गंतव्य
ऋषिकेश। रविवार को जनता कर्फ्यू के बावजूद पंजाब, नोएडा, दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई में काम करने वाले पहाड़ी मूल के 19 युवक बीटीसी पहुंच गए। मगर परिवहन निगम और परिवहन कंपनियों की हड़ताल होने के कारण अपने गंतव्यों के लिए उन्हें बसें उपलब्ध नहीं हो पाई। इससे वह काफी परेशान हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची तहसीलदार रेखा आर्य ने सभी युवकों से पूछताछ की व परिवहन निगम के एजीएम पीके भारती को मौके पर बुलाया। इस दौरान युवकों ने बताया कि वह बाहरी राज्यों के होटलों में कार्यरत हैं। कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सभी जगहों पर होटलों को बंद कर दिया या है। इस कारण उन्हें घर वापसी आना पड़ा है। इस दौरान तहसीलदार ने पाया कि बीटीसी समेत सरकारी अस्पताल में थर्मल स्क्रीनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सूमो यूनियन से वार्ता एक सूमो और सरकारी अस्पताल से वार्ता कर एक एंबुलेंस मौके पर बुलाई। इसके बाद सभी 19 युवकों को एम्स में थर्मल स्क्रीनिंग के लिए भेजा। इस दौरान तहसीलदार ने रोडवेज एजीएम को युवकों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें गंतव्यों तक पहुंचने के लिए बस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस पर एजीएम ने बताया कि आपातकालीन स्थिति के लिए दो बसें रखी गई हैं।
रविवार को  सुनसान पड़ा डोईवाला चौक।
रविवार को सुनसान पड़ा डोईवाला चौक।- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश में सुनसान पड़ा आईएसबीटी मार्ग।
ऋषिकेश में सुनसान पड़ा आईएसबीटी मार्ग।- फोटो : RISHIKESH
04 सुनसान रहा त्रिवेणी घाट रोड
04 सुनसान रहा त्रिवेणी घाट रोड- फोटो : RISHIKESH
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सुबह से शहर रहा सुनसान, शाम तक आवाजाही कम

मशहूर शायर बशीर बद्र लिखते हैं- यूं ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में रहा करो, वो ग़जल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो, कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिजाज का शहर है, जरा फासलों से मिला करो। इन लाइनों को बशीर बद्र साहब जाने कब लिख गए, लेकिन यही आज की हकीकत है। इन नजरों ने शहर की तस्वीर उतारी है, जहां तलक नजर दौड़ाई जिंदगी भारी है.... कैसे-बता रहे हमारे वरिष्ठ संवाददाता विनोद मुसान तीर्थनगरी लाइव में-
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो...
ऋषिकेश। बीते दिवस यानि रविवार को आप घरों में कैद थे। चिकित्सा कर्मियों, पुलिस के अलावा आवश्यक सेवा से जुड़े कुछ लोगों के साथ हम अखबारनवीस भी सड़कों पर थे। शटर वाले टीवी से एलईडी और रिंगिग वाले टेलीफोन से मोबाइल देखने वाली पीढ़ी के लिए महामारी से बचने का ये कर्फ्यू भी नया था। ऐसा पहली बार हुआ, जब पूरा देश घर में सोकर भी जाग रहा था। आने वाले दिन कैसे होंगे, इसका तो पता नहीं, लेकिन बीते दिन के कुछ दृश्य हम
सुबह छह बजे
सुबह छह बजे आंख खुली तो सड़कों पर कुछ गाड़ियों के आने-जाने की आवाज सुनाई दी। इधर, टहलते हुए अखबार के हॉकरों के पास पहुंचा तो वे जल्दी में दिखाई दिए। सब सात बजे से पहले घरों में अखबार पहुंचा देना चाहते हैं। इक्का-दुक्का चाय की दुकानें भी खुल चुकी हैं। लोग चाय पीते हुए कोरोना के साथ मोदी जी के 14 घंटे के जनता कर्फ्यू पर चर्चा करते हुए दिखाई दिए। बोले, मोदी जी की ये तरकीब सफल हुई तो आने वाली पीढ़ियां उन्हें हमेशा याद रखेंगी। टहलते हुए त्रिवेंणी घाट पर पहुंचे तो यहां नित गंगा पूजन करने वाले कई भक्त जल चढ़ाते नजर आए। आसपास के मंदिरों में भी धूप-दीए के साथ लोग भगवान की पूजा अर्चना कर रह हैं। सात बजते-बजते फिर से घाट सुनसान हो गया।
आठ बजे
आठ बजे त्रिवेणी घाट पर अब यहां संन्नाटा है। घाट पर स्थित इंद्रवती विश्राम गृह भिक्षुओं से भरा है। इनका कोई घर नहीं, कहां जाएं। आज रोटी भी नसीब होगी या नहीं, सबको इसी की चिंता है। लेकिन झुंड में बैठे इन लोगों को देखकर चिंता जरूर हुई। भगवान न करे इनमें अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित हो गया तो फिर क्या होगा? ये सुबह-सुबह उठकर रोज घर-घर जाकर भीक्षा मांगते हैं। एक इलाके से दूसरे इलाके में टहलते हैं। अभी देर नहीं हुई सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा।
10 बजे
अब शहर के थाना क्षेत्रों में जायजा लेने की बारी थी। सुनसान सड़कों की दोनों तरफ दुकानों के बंद शटर जैसे आपस में बातें कर रहे थे। आह..! कितने दिनों बाद आज खुलने-बंद होने की खड़खड़ नहीं सुनाई दी। इधर, शहर की अलग-अलग चौकियों के प्रभारी शहर के प्रमुख व्यापारियों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। आने वाले दिनों यदि आपातकाल की स्थिति आती है, तो पुलिस खुद लोगों के घरों तक राशन पहुंचाएगी। इस बात ने काफी सुकून दिया डंडे वाली पुलिस पब्लिक के बारे में इतनी गहराई से सोचती है। किसके आदेश पर यह सब कार्रवाई कर रहे है, पूछने पर चौकी प्रभारी बताते हैं, कोतवाल साहब (रितेश शाह) का आदेश है। अपनी तैयारी पूरी रखो।
12 बजे
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से होते हुए मैं कोतवाली जा पहुंचा। इधर, कोतवाली में भी शांति है। न वादी हैं न फरीयादी। पुलिस भी अपने-अपने काम में लगी है। प्रवेश द्वार पर ही हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की व्यवस्था की गई है। एक बोर्ड पर साफ लिखा है, कोतवाली में घूसने से पहले हाथ धोकर ही प्रवेश करें। कोतवाल रितेश शाह के बारे में पूछने पर एक सिपाही इशारा करता है। वे एक पेड़ के नीचे खड़े हैं। तभी मैंने पास जाकर पूछा क्या देख रहे हो। बोले, देख नहीं सुन रहा हूं। तुम भी सुनों। वाकही.. इस शहर में चिड़ियों की इतनी तेज चहचहाट कोतवाल ही नहीं मैंने भी पहली बार सुनी। रोज गाड़ियों की आवाज में चिड़ियों की आवाज दब जाती है। लेकिन आज इनका झुंड पूरे सबबा में कौतूहल कर रहा है। कोरोना का कहर ही सही, लेकिन आज उसने हमें पक्षियों के संसार में झांकने का भी मौका दे दिया। मैंने पूछा भाई साहब, शहर में शांति है। बोले, जब इंसानों की आवाज दब जाए और पशु-पक्षियों की आवाज सुनाई दे, तब समझ जाओ, वाकही शांति है। खैर, वैसे कहीं से भी किसी अप्रिय घटना का कोई समाचार नहीं है। चलो आओ चाय पीते हैं....
2 बजे
रात बारिश के बाद हवा में ठंडक है, लेकिन दोपहर होते-होते धूप तेज हो चली है। सड़कों पर दिखाई देने वाले इक्का-दुक्का लोग भी अब नजर नहीं आ रहे हैं। पुलिस कहीं नजर नहीं आ रही है। या यूं कहें कि जरूरत नहीं नहीं है। लोग स्वत:स्फूर्त जनता कर्फ्यू का पालन कर रहे हैं। जनता का कर्फ्यू जनता के लिए...। ऐसा शायद पहली बार हो रहा है, जब एग्जाम हॉल में कोई मास्टर नहीं है और लोग नकल भी नहीं कर रहे। रात की बसों में कुछ लोग दिल्ली, चडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और दूसरी जगहों से ऋषिकेश पहुंचे थे। सुबह चंद्रभागा पुल, बस स्टैंड नटराज चौक, टैक्सी स्टैंड आदि स्थानों से ऊपर पहाड़ों में चढ़ने के लिए वाहन का इंतजार करते हुए नजर आए थे। सोचा उनकी भी खबर ली जाए। कभी अब भी तो खड़े नहीं है इधर-उधर। पूरा चक्कर मारा तो कहीं लोग नहीं दिखाई दिए। इतने में एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला का फोन आ गया, उन्होंने बताया कि कुछ लोगों के सवारी वाहनों को लेकर ढूंढखोज की खबर आई थी। इस पर कुछ वाहनों को आइसोलेट कर उनमें सवारियां बैठाकर गतंव्य के लिए रवाना किया गया।
4 बजे शाम
आज शहर में नेता-अभिनेता, कोई नहीं मिल रहा। दुआ-सलाम भी बंद है। किसी के घर जाने की सोच भी नहीं सकते। जाना भी नहीं चाहिए। लोग शंका भरी नजरों से देखते हैं। पता नहीं कहां से आ रहे हैं। सुबह से कुछ नहीं खाया। सोचा किसी मित्र के यहां चला जाऊं, लेकिन फिर मन मसोस कर रह गया। खैर आज वर्त ही सही। इधर, एक राह से गुजरते हुए बुजुर्ग दंपती मिल गया। पूछने पर बुजुर्ग महिला ने बताया, सांस की दिक्कत है। अस्पताल जा रहे हैं। बुखार इत्यादी तो नहीं है। बोले नहीं। वर्षों से दिक्कत है। अस्पताल से दवाई लेने जा रहे हैं। मैंने कहा, ऐसे मत जाओ, रूको गाड़ी बुलाता हूं। पुलिस को फोन लगाया और गाड़ी मंगाकर उन्हें अस्पताल रवाना किया। उनकी दुवाओं के साथ आगे बढ़ा तो सबकुछ व्यस्थित नजर आया। दून चौराहा शहर का प्रमुख केंद्र है।
6 बजे शाम
वातावरण में थोड़ी सी ठंडक आ चुकी है। लेकिन कोरोना की गर्मी ने अब भी लोगों को घरों में ही कैद कर रखा है। या यूं कहें, वे इस राष्ट्रीय मिशन में डटकर अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। राजकीय चिकित्सालय में भी सुबह से बहुत कम लोग पहुंचे हैं। यहां का स्टाफ मुस्तैद, लेकिन सुस्ता रहा है। चेहरों में मास्क है, चहलकदमी बेहद कम। तहसील में, सीओ दफ्तर, रजिस्ट्रार दफ्तर, खाद्य आपूर्ति कार्यालय, आबकारी कार्यालय, राजस्व, कोर्ट इत्यादी सब सूने पड़े हैं। हरिद्वार की तरफ जाने वाली सड़क भी सुनसान पड़ी है। जगह-जगह वाहन भी खड़े सुस्ता रहे हैं। आवारा पशु तक आज नहीं दिखाई दे रहे हैं। इधर, नगर निगम भी कर्फ्यू के साए में है। यहां भी कोई नहीं दिखाई दे रहा। कई बार यह दृश्य डरावना सा लगता है।
रात 8 बजे
स्ट्रीट लाइटें जल चुकी हैं। लोगों के घरों में रोशनी है। खिड़कियों से ताकझांक हो रही है, लेकिन लोग जनता कर्फ्यू का अब भी शिद्दत से पालन कर रहे हैं। सड़कें अब भी सुनसान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से रात 9 बजे तक का आह्वान किया है। लेकिन, जितने भी लोगों से इस बीच हमने बातचीत की, सबका यही कहना था हम अब कल ही बाहर निकलेंगे। लेकिन कुछ बेसबरे हैं, जो रात नौ बजते ही हुड़दग के मूड़ में दिख्रते हैं। किसी को दारू लेने ठेके जाना है तो किसी को रिश्तेदारी निभानी है। जो भी हो, जिस तरह लोगों ने पूरे दिन जनता के लिए जनता के कर्फ्यू को सफल बनाया, उम्मीद है जब तक इस खतरनाक वायरस का खात्मा नहीं हो जाता, लोग खुद संयम बरतेंगे। ये वायरस सिर्फ आज के लिए आपके शहर में आने वाला नहीं था। ये कभी भी आज सकता है।
 सुनसान पड़ा लक्ष्मणझूला मार्ग।
सुनसान पड़ा लक्ष्मणझूला मार्ग।- फोटो : RISHIKESH
 सुनसान पड़ा बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग।
सुनसान पड़ा बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग।- फोटो : RISHIKESH
भद्रकाली में पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्य कर्मी।
भद्रकाली में पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्य कर्मी।- फोटो : RISHIKESH
चद्रभागा नदी में जनता कर्फ्यू के दौरान क्रिकेट का आनंद लेते बच्चे।
चद्रभागा नदी में जनता कर्फ्यू के दौरान क्रिकेट का आनंद लेते बच्चे।- फोटो : RISHIKESH
सुनसान रहा रेलवे रोड।
सुनसान रहा रेलवे रोड।- फोटो : RISHIKESH
सुनसान पड़ा भद्रकाली मार्ग।
सुनसान पड़ा भद्रकाली मार्ग।- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश में  जनता कर्फ्यू के दौरान सुनसान पड़ा पैट्रोल पंप
ऋषिकेश में जनता कर्फ्यू के दौरान सुनसान पड़ा पैट्रोल पंप- फोटो : RISHIKESH
 सुनसान पड़ा चारधाम यात्रा बस अड्डा।
सुनसान पड़ा चारधाम यात्रा बस अड्डा।- फोटो : RISHIKESH
हरिद्वार मार्ग पर गुजरता विदेशी नागरिकों का जोड़ा।
हरिद्वार मार्ग पर गुजरता विदेशी नागरिकों का जोड़ा।- फोटो : RISHIKESH
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कोरोना: ऋषिकेश में रुकी बीमार ऑस्ट्रेलियाई महिला अचानक हुई गायब, ढूंढने में लगी पुलिस

कोरोना वायरस के खौफ के बीच उत्तराखंड के ऋषिकेश में रुकी बीमार ऑस्ट्रेलियाई महिला अचानक गायब हो गई। महिला के संक्रमित होने की आशंका है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम अब महिला को ढूंढने में लगी है।

जानकारी के अनुसार, महिला एक महीने से ऋषिकेश के तपोवन में एक महिला के घर में रह रही थी। वह काफी बीमार थी। शनिवार शाम को वह अचानक वहां से गायब हो गई। 

महिला के घर में न होने कमी सूचना मकान मालकिन ने तुरंत पुलिस को दी। महिला ने बताया कि वह कुछ दिन से बीमार थी। उसे बुखार और खांसी थी। उसने अपनी जांच भी नहीं कराई थी। इसके बाद से ही मुनिकीरेती थाना पुलिस इस महिला को ढूंढ रही है।
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कोरोना : केवल आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मी ही निकलें बाहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर रविवार को जनता कर्फ्यू रहेगा। जिसको सफल बनाने को लेकर जिला प्रशासन के साथ नगर निगम ने भी कमर कस ली है। इस दौरान सभी लोग घरों में रहेंगे। केवल आवश्यक सेवा के कर्मी ही अपनी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। मेडिकल स्टोर, ्अस्पताल, राशन की दुकानें, सब्जी, दूध की दुकानें खुली रहेंगी। साथ ही प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहेगा।
इस दौरान नगर को स्वच्छ बनाने रखने के लिए नगर निगम ने सफाई कर्मियों के लिए नया प्लान जारी किया है। सफाई कर्मचारी रविवार को सुबह चार बजे से सात बजे तक नगर की सफाई करेंगे और इसके बाद अपने घरों को लौट जाएंगे। इधर, नगर निगम ने शहर में दो कोरेंटाइन सेंटर चिह्नित कर जिला प्रशासन को सौंप दिए हैं। इनमें आगे की व्यवस्थाएं जिला प्रशासन अपने स्तर पर जुटाएगा। शनिवार को विभिन्न माध्यमों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को लोगों के बीच प्रसारित किया गया। उधर, कोरोना वायरस से निपटने के लिए शहर के लोगों ने भी लामबंद होने का मन बना लिया। शहर के व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद रखने की घोषणा की है।
कर्फ्यू आपकी केयर के लिए है, सफल बनाएं : मेयर
ऋषिकेश। जनता-कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए मेयर अनिता ममगाई ने लोगों से अपील की है, उनका कहना है कि ये कोई कर्फ्यू नहीं, बल्कि आपकी केयर का समाधान है। आप घर में रहकर खुद अपना जीवन सुरक्षित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को लेकर लोगों से एकजुटता दिखाते हुए सरकार का सहयोग करने की अपील की है। बाजार आदि भीड़ वाले इलाकों से बचने के लिए लोगों से अपील की है।
घबराने की नहीं सजग रहने की है जरूरत : विस अध्यक्ष
ऋषिकेश। कोरोना वायरस से घबराने की नहीं सजगता की जरूरत है। इस रोग की रोकथाम, नियंत्रण हम और आज मिलकर कर सकते हैं। ये हमारे देश में महामारी ने बनें, इसलिए इसके रोकने का यही सही समय है। लोगों को जागरूक, सजग और सुरक्षित रहना ही बीमारी से बचा जा सकता है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए किए जा रहे प्रयासो को लेकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सभी प्रदेशवासियों से रविवार को घर से न निकलने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च को जनता कर्फ्यू पर सभी को कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए प्रात: 7:00 बजे से रात्रि
9:00 बजे तक अपने अपने घरों में ही रहें।
नगर निगम में चलाया जन जागरूकता अभियान
ऋषिकेश। कोरोना वायरस को लेकर नगर निगम ने अपने स्तर से जन जागरूकता अभियान चलाया। शनिवार को जन जागरूकता अभियान के बाद हॉस्पिटल, टैक्सी स्टैंड, टैंपों स्टैंड, बस अड्डे आदि सार्वजनिक स्थानों पर सेनेटाइजेशन का अभियान चलाया गया। निगम कर्यालय के अलावा विभिन्न जगहों पर कीटनाशकदवाओं का छिड़काव कराया गया।
आज नहीं चलेंगी रोटेशन की बसें
ऋषिकेश। संयुक्त रोटेशन व्यवस्था समिति ने बैठक आयोजित कर कोरोना वाइरस से बचने के लिए रविवार को सभी आवश्यक सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष नवीनचंद रमोला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च को सभी वाहन सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। उन्होंने जनता से अपील की है कि रविवार को लोग अपने घरों में रहें, कोई भी बाहर ना निकलें।
परिवहन संस्थाओं से भी आह्वान
ऋषिकेश। उत्तराखंड परिवहन महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय शास्त्री व महासचित जितेंद्र नेगी ने सभी व्यावसायिक वाहन स्वामियों ओर परिवहन संस्थाओं के वाहन स्वामियों से राष्ट्रीय आपदा को देखते हुए आज अपने वाहन सड़कों पर न चलाने का आग्रह किया है।
कृषि मंडी में किया सेनेटाइजर का छिड़काव
ऋषिकेश। कृषि उत्पादन मंडी समिति की ओर से मंडी कार्यालयों में आज दूसरे दिन भी सेनेटाइजर का छिड़काव किया गया। मंडी समिति के अध्यक्ष विनोद कुकरेती ने बताया कि वर्तमान समय में कोरोना वायरस से पूरे देश में भय का वातावरण पैदा हो गया है।
नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने भी किया आह्वान
ऋषिकेश। नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने ने जनता कर्फ्यू के लिए लोगों में रविवार को घरों से बाहर न निकलने का आह्वान किया है। महामंत्री ललित मोहन मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों से जनता कर्फ्यू को समर्थन देने का आह्वान किया है। इसके लिए रविवार को सभी व्यापारी अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे।
नहीं चलेंगे तिपहिया वाहन
ऋषिकेश। कोरोना वाइरस को देखते हुए विक्रम यूनियन और ऑटो यूनियन रविवार अपने वाहनों को सड़कों पर नहीं चलाएंगे। आम जनता के स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस दौरान शासन के निर्देशों के अनुसार सभी तिपहिया वाहनों में कीटाणु नाशक दवाई का छिड़काव किया गया। इसके साथ ही सभी तिपहिया वाहन चालकों को मास्क वितरण किया गया।
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