देवभूमि में कैसे सुरक्षित हों गजराज, एक साल से अधर में प्रस्ताव

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Tue, 24 Nov 2020 11:57 PM IST
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रुड़की। राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क से सटे बुग्गावाला क्षेत्र में हाथियों की सुरक्षा का प्रस्ताव अधर में है। यहां हजारों बीघा भूमि पर अक्सर हाथियों की आवाजाही रहती है। कई बार शिकारी इन्हें अपना निशाना बना लेते हैं तो कई बार गजराज किसानों की फसलों को तहस नहस कर देते हैं। दोनों ओर का नुकसान रोकने के लिए वन विभाग ने एक साल पहले औरंगाबाद से बंजारावाला तक 14 किमी लंबी सोलर तार बाड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। वन विभाग खाई खोदकर जैसे तैसे गजराज की आमद रोकने में लगा है।
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घाड़ क्षेत्र के बुग्गावाला, रायघटी, नौकराग्रंट समेत 30 से अधिक गांव राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क के जंगलों से सटे हैं। इसके अलावा खादर क्षेत्र में सुल्तानपुर, पथरी, बिशनपुर कुंडी आदि गांव भी जंगल से सटे हैं। इन गांवों में आए दिन हाथी समेत तमाम जंगली जानवरों की आमद बनी रहती है। कई बार शिकारी इनको अपना शिकार बना लेते हैं तो कई बार फसलों की सुरक्षा के लिए लगाई गई बिजली के तार बाड़ की चपेट में आकर जंगली जानवर जान से हाथ धो बैठते हैं। ऐसे में जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर उपाय सोलर आधारित तार बाड़ है। इससे टकराने पर जानवरों को झटका तो जरूर लगता है, लेकिन जान को कोई खतरा नहीं होता। सरकार की ओर से सोलर तार बाड़ नहीं लगाए जाने के चलते कई बार किसान बिजली की तार बाड़ कर देते हैं, जिससे जंगली जानवरों की जान पर संकट आ जाता है। इन घटनाओं की रोकथाम के लिए वन विभाग ने करीब एक साल पहले बुग्गावाला क्षेत्र में औरंगाबाद से बंजारावाला के बीच 14 किमी लंबी सोलर तार बाड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन इसे अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। ऐसे में विभाग खाई खोदकर जानवरों की आमद रोकने में जुटा है।

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खोदी गई 1200 मीटर लंबी खाई
वन प्रशासन अपने स्तर से जंगली जानवरों को आबादी की तरफ बढ़ने से रोकने का प्रयास कर रहा है। सोलर तार बाड़ को मंजूरी नहीं मिलने के चलते हाल ही में रायघटी में 600 मीटर लंबी खाई खोदी गई है। रेंजर ने बताया कि पिछले साल करीब 600 मीटर लंबी खाई खोदी गई थी।
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जान बचाने के चक्कर में भी गंवाते हैं जान
आमतौर पर जंगली जानवर भूख प्यास मिटाने के लिए आबादी की तरफ आते हैं, लेकिन कई बार पीछे भाग रहे चीते आदि से जान बचाने के लिए छोटे जानवर आबादी की तरफ भागते हैं। ऐसे में बिजली की तार बाड़ हो तो उससे टकरा जाते हैं। लिहाजा सोलर तार बाड़ ही जानवरों की सुरक्षा का बेहतर उपाय हो सकता है।
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आठ किमी तार बाड़ किसी काम की नहीं
महज सोलर तार बाड़ लगाने से ही सुरक्षा संबंधी काम पूरा नहीं हो जाता बल्कि इसकी रखरखाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। मेंटीनेंस के अभाव में सुल्तानपुर क्षेत्र में करीब छह साल पहले लगाई आठ किमी लंबी सोलर तार बाड़ कई जगहों पर खराब पड़ी है। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर तार बाड़ टूट चुकी है। कई जगहों पर खनन की ढांग से तारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यदि इन तारों के आसपास घास और झाड़ियां उग आती हैं तो करंट दौड़ना बंद हो जाता है। वन रेंजर राम सिंह ने बताया कि सोलर तार बाड़ लगती है तो मेंटीनेंस पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। प्रतिदिन मेंटीनेंस के लिए वर्कर्स नियुक्त किए जाएंगे।
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सोलर तार बाड़ जरूरी है। जंगली जानवरों की सुरक्षा के मद्देनजर एक साल पहले विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। इसमें औरंगाबाद से बंजारेवाला गांव तक 14 किमी लंबी सोलर तार बाड़ की सिफारिश की गई है। शासन की ओर से मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।
-राम सिंह, वन रेंजर, सामाजिक वानिकी खानपुर रेंज
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सोलर तार बाड़ की कार्रवाई चल रही है। मंगलवार को ही मुख्यमंत्री ने वन्य जीव संरक्षण कमेटी की बैठक ली है। मैं भी कमेटी का सदस्य हूं। इस संबंध में मुख्यमंत्री की ओर से आदेश जारी किया जा रहा है।
-सुरेश राठौर, ज्वालापुर विधायक

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