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Lockdown In Uttarakhand Live Updates : लॉकडाउन के दौरान एंबुलेंस में स्मैक की तस्करी करते चार युवक गिरफ्तार

कोरोना वायरस को लेकर उत्तराखंड में लॉकडाउन आज भी जारी है। सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात है।

29 मार्च 2020

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उत्तर काशी

रविवार, 29 मार्च 2020

25 को मुखबा गांव से धाम रवाना होगी मां गंगा की डोली

गंगोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर आगामी 26 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। बुधवार को नवरात्र पर श्री पांच मंदिर समिति गंगोत्री द्वारा विधि विधान के साथ कपाटोद्घाटन का मुहूर्त निकाला गया।
समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि 25 अप्रैल को दोपहर 12.30 बजे शीतकालीन पड़ाव मुखबा गांव से मां गंगा की डोली गंगोत्री धाम के लिए रवाना होगी। यात्रा के पहले दिन मां गंगा की डोली भैरोंघाटी स्थित भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद अगले दिन 26 को डोली यात्रा पुन: गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी, जहां पहुंचने के बाद विशेष पूजा अर्चना के साथ शुभ मुहूर्त दोपहर 12.35 बजे पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इस बीच कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप पर चिंता जाहिर करते हुए मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने 14 तारीख के बाद कपाटोद्घाटन समारोह की रणनीति बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अगर लॉकडाउन के बाद भी हालात नहीं सुधरे, तो केवल मंदिर के पुजारी व समिति के सदस्य ही डोली यात्रा में शामिल होंगे। हालांकि इस संबंध में प्रशासन से चर्चा करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में अरुण सेमवाल, दीपक सेमवाल, प्रेम वल्लभ सेमवाल, राजेश सेमवाल, अंबरीश सेमवाल, संजय सेमवाल आदि मौजूद रहे। उधर, यमुनोत्री धाम के कपाट भी 26 अप्रैल को खोले जाने हैं, लेकिन अभी कपाटोद्घाटन का मुहूर्त नहीं निकाला गया है। यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहित आशुतोष उनियाल ने बताया कि यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन का शुभ मुहूर्त आगामी 31 मार्च को यमुना जयंती पर निकाला जाएगा।
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लॉकडाउन से उत्तरकाशी में फंसे 19 विदेशी पर्यटक

कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में जनपद में कुल 101 विदेशी नागरिक मौजूद हैं। इनमें से 82 विदेशी पंजीकृत हैं और लंबे समय से उत्तरकाशी में ही निवास कर रहे हैं। टूरिस्ट वीजा पर भारत आए 19 विदेशी पर्यटक भी लॉक डाउन के चलते उत्तरकाशी में ही रुके हुए हैं। इनमें से एक विदेशी पर्यटक को जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
जनपद में महर्षि आश्रम के गजोली और कुंसी आश्रम में कुल 68 विदेशी नागरिक लंबे समय से योग साधना के लिए ठहरे हुए हैं। इनके अलावा आर्य विहार सैंज में 8, हिम क्रिश्चियन एकेडमी मातली में 2, पाइनवुड फाउंडेशन स्कूल डुंडा में एक व पाटा गांव में एक विदेशी नागरिक रह रहा है। इनके अलावा ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत सिल्क्यारा-पोल गांव सुरंग निर्माण से जुड़े ग्रीस के दो इंजीनियर भी जनपद में हैं, जिन्हें बड़कोट के एक होटल में ठहराया गया है। यह सभी विदेशी जिले में पंजीकृत हैं और लंबे समय से यहां हैं। इनमें से किसी में भी कोरोना संक्रमण का कोई लक्षण नहीं है।
इनके अलावा बीते दिनों टूरिस्ट वीजा पर उत्तरकाशी पहुंचे 19 विदेशी पर्यटक भी लॉक डाउन के चलते उत्तरकाशी में ही रुके हुए हैं। इनमें से रूस, यूक्रेन, जापान एवं बेलारूस के कुल 11 पर्यटकों को पायलट बाबा आश्रम में ठहराया गया है, जबकि इजराइल, फ्रांस, कनाडा, रूस, चैक रिपब्लिक, जर्मनी एवं इंग्लैंड के 1-1 पर्यटक होम स्टे में जिला मुख्यालय के आसपास ठहरे हैं। बीते दस मार्च को भारत आए मलेशिया के एक पर्यटक को प्रशासन ने जिला अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में रखा है। इसकी जांच के लिए सैंपल लैब में भेजे गए हैं, जिसकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है। अभी तक की जांच में जिले में मौजूद किसी विदेशी नागरिक में कोरोना संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। लॉकडाउन खुलने तक सभी विदेशी पर्यटकों को अपने स्थान पर ही क्वारंटीन रहने को कहा गया है।
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चारधाम यात्रा 2020: अक्षय तृतीय के अवसर पर खोले जाएंगे गंगोत्री धाम के कपाट

गंगोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीय के अवसर पर आगामी 26 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। बुधवार को नवरात्रि के अवसर पर श्री पांच मंदिर समिति गंगोत्री धाम द्वारा विधिविधान के साथ कपाटोद्घाटन की तिथि व समय निकाला गया।

समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि 25 अप्रैल को दोपहर साढ़े बारह बजे शीतकालीन पड़ाव मुखबा गांव से मां गंगा की डोली गंगोत्री धाम के लिए रवाना होगी। यात्रा के पहले दिन मां गंगा की डोली भैरव मंदिर में ही रात्रि विश्राम करेगी। जिसके बाद अगले दिन 26 तारीख को डोली यात्रा पुनः गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी।

जहां पहुंचने के बाद विशेष पूजा अर्चना के साथ 12 बजकर 35 मिनट के शुभ मुहूर्त  पर मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।
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बाहरी राज्यों में फंसे लोग लगा रहे घर वापसी की गुहार

राहत : सभी सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव

रोजी रोटी का संकट होने पर पैदल ही घर लौटने लगे हैं बाहरी मजदूर

उत्तरकाशी। जिले में बाहरी राज्यों से आकर दिहाड़ी मजदूरी करने वाले श्रमिकों को अब घर लौटने की चिंता सताने लगी है। यही कारण है कि लॉकडाउन में वाहन नहीं चलने के कारण कई मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए लौट रहे हैं। शनिवार को भी इसी तरह पैदल घर लौट रहे करीब दो दर्जन मजदूरों को पुलिस ने लौटा कर उनके भोजन की व्यवस्था कराई।
शनिवार को बाहरी राज्यों के करीब दो दर्जन मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए चल दिए। सूचना मिलते ही प्रशासन ने पुलिस की टीम को इनके पीछे दौड़ाया। पुलिस डुंडा के पास से मजदूरों को समझा बुझाकर उत्तरकाशी लाई। पुलिस ने इन मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था कराई। साथ ही लॉकडाउन की अवधि में उत्तरकाशी स्थित अपने डेरों में ही बने रहने की अपील की। एसडीएम देवेंद्र नेगी ने बताया कि बाहरी जनपदों के ऐसे मजदूरों जिनके पास यहां का राशन कार्ड भी नहीं है को सूचीबद्ध किया जा रहा है। जल्द ही इन्हें एक हफ्ते के खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे। तब तक इन मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
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उत्तराखंड : हिमखंड से चांगथांग में गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध, बीआरओ की टीम काटने में जुटी

बारिश ने रोके कदम, प्रभावी दिखा लॉकडाउन

कोरोना वायरस से निपटने के लिए घोषित लॉकडाउन शुक्रवार को प्रभावी रहा। बारिश के कारण जहां लोगों ने कदम घरों में ही रुके रहे वहीं शुक्रवार को प्रशासन की ओर से लोगों को सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक जरूरी सामान की खरीद के लिए दिए गए समय के कारण भी भीड़ नहीं लगी।
बीते दिनों के मुकाबले यह अवधि दोगुनी होने शुक्रवार को कम संख्या में ही लोग घरों से बाहर निकले। उत्तरकाशी जिला मुख्यालय समेत जिले के सभी शहरों में आवश्यक वस्तुओं की दुकानों के बाहर कम भीड़ के चलते लोग सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते नजर आए। इसके साथ ही सुबह से ही जिले में बारिश का सिलसिला जारी रहने के कारण भी कम ही लोग सड़कों पर दिखाई दिए। रसोई गैस सिलिंडरों की होम डिलीवरी की व्यवस्था नहीं बन पाने से जगह-जगह गाड़ियां खड़ी कर सिलिंडर वितरित किए गए। इस दौरान भी लोग पर्याप्त दूरी बनाकर खड़े रहे। उधर, रुद्रप्रयाग में भी लॉकडाउन के पांचवें दिन बारिश के चलते लोगों की ज्यादा चहलकदमी नहीं दिखी। एक बजते ही पूरे बाजार में सन्नाटा पसर गया। दिनभर रुक-रुककर होती रही बारिश के कारण लोग बाजारों को नहीं निकल पाए। गोपेश्वर में भी यही स्थिति रही। बारिश के चलते भी लोग कम ही बाजार आए। गोपेश्वर, चमोली, नंदप्रयाग, जोशीमठ, पोखरी, घाट सहित कई जगहों पर प्रशासन लॉकडाउन का सख्ती से पालन करवा रहा है। दुकानों के बाहर लोग सोशल डिस्टेंस बनवाकर सामान खरीद रहे हैं। वहीं बाजार में पुलिस ने चौपहिया वाहनों का प्रवेश नहीं होने दिया। नई टिहरी में लॉकडउन में ढील मिलने पर लोगों ने काफी राहत महसूस की। अन्य दिनों की तरह दुकानों में भीड़ नहीं उमड़ी। जरूरी चीजों की खरीददारी के लिए सुबह सात से एक बजे तक का समय मिलने से लोग अलग-अलग समय पर खरीददारी करने पहुंचे।
देवाल में जरूरी चीजों की कमी
देवाल। बाजार में आवश्यक चीजों की कमी होने लगी है। दूरस्थ गांवों में राशन की सप्लाई बंद हो गई है। एसडीएम केएस नेगी ने चौकी प्रभारी व पूर्ति निरीक्षक को बाजार का निरीक्षण कर प्रतिदिन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। कहा कि कालाबाजारी करने वालों पर नजर रखी जाए। एसडीएम ने देवाल, थराली व नारायणबगड़ के दूरस्थ गांव में राशन पहुंचाने के लिए 11 स्थानीय दुकानदारों को जिम्मेदारी दी। मुंदोली व बेेरागाड़ व मेलखेत क्षेत्र में अभी तक रसोई गैस सिलिंडर नहीं भेजे गए।
प्रशासन ने किया बाजारों का निरीक्षण
कर्णप्रयाग/गैरसैंण। लॉकडाउन के दौरान कर्णप्रयाग सहित ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। बाजार में सिर्फ जरूरी सामानों की दुकानें खुली रहीं। एसडीएम वैभव गुप्ता और तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़ ने बाजार का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एसडीएम ने कहा कि दुकानदारों को उपभोक्ताओं के बीच दूरी बनाए रखने के लिए दुकानों के आगे गोले बनाने व रेट लिस्ट लगाने को कहा। गैरसैंण में एसडीएम कौस्तुभ मिश्र, नायब तहसीलदार राकेश पल्लव और थानाध्यक्ष रविंद्र नेगी ने बाजार का भ्रमण किया। एसडीएम ने कहा कि किसी भी तरह की भ्रांति या अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी।
मुश्किल में फंसे लोगों को गंतव्य तक पहुंचाया
रुद्रप्रयाग। जिला चिकित्सालय में उपचार कराने पहुंचे चमोली जनपद के सीमावर्ती गांव लोहागंज के लिए पैदल सफर कर रहे लोगों को जिला प्रशासन ने अपने गंतव्य तक पहुंचाया गया है। लोहाजंग निवासी मादोराम के बेटे का हाथ फैक्चर हो गया था। 108 के जरिये जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाकर उसका उपचार किया गया। बच्चे के हाथ पर प्लास्टर होने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें घर भेज दिया, लेकिन घर जाने के लिए उन्हें कोई वाहन नहीं मिलने से वह पैदल ही निकल पड़े। इसी बीच ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर उनके जाने की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ने वाहन भेज उन्हें गंतव्य तक पहुंचाया। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी उपचार या किसी कारणवश बाजारों में फंसे लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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मदद चाहिए तो टोल फ्री नंबर लगाइए

लॉकडाउन के दौरान घरों में कैद लोगों को आ रही दिक्कतों के समाधान एवं समन्वय के लिए डीएम डा.आशीष चौहान ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। लोग इन नंबरों पर संपर्क कर अपनी शिकायतों एवं समस्याओं का निस्तारण करा सकती है।
डीएम ने बताया कि आपात कालीन परिचालन केंद्र पर दूरभाष नंबर 01374222722, 7252887587, 7310923129 पर संपर्क किया जा सकता है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए सीएमओ कंट्रोल रूम जिला अस्पताल परिसर में तैनात नोडल अधिकारी डा.विपुल विश्वास से दूरभाष नंबर 01374222641 एवं 7248336889 पर संपर्क किया जा सकता है। जबकि एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र नेगी से 9410191049 एवं 8126167413, एसडीएम डुंडा आकाश जोशीसे 7579073428, 9058686742, एसडीएम बड़कोट सोहन सिंह सैनी से 9719773528, 9411582665 एवं 7830 196914 तथा एसडीएम पुरोला मनीष कुमार सिंह से 8447513145, 01373223321, 9720656880 एवं 9410313431 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान एवं समन्वय के लिए नोडल अधिकारी एडीएम तीर्थपाल सिंह 9412990299, ईई लोनिवि सुरेश तोमर 7579186700, परियोजना निदेशक राजेंद्र रावत 941114 9140, पूर्ति अधिकारी गोपाल मटूड़ा 9410180103, कंट्रोल रूम 01374222177, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल 9456147974 नंबर पर उपलब्ध रहेंगे।
हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर ले सकते हैं मदद
नई टिहरी। डीएम डा. वी षणमुगम ने बताया कि टिहरी जिले में स्थिति नियंत्रण में है। लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए कंट्रोल रूम चौबीस घंटे सक्रिय है। साथ ही दो नए टोल फ्री नंबर 18001804102 और 18001804103 भी सूचना के आदान प्रदान के लिए कंट्रोल रूप में स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि जिले में असंगठित क्षेत्र और निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों का सर्वे किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर प्रशासन की ओर से उन्हें खाद्यान्न किट वितरित की जाएगी। जिले के आठ चेक पोस्टो से प्रवेश करने वाले 515 लोगों की अब तक स्क्रीनिंग की गई है।
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Coronavirus in Uttarakhand: 18000 से ज्यादा लोग देश-विदेश से लौटे पहाड़, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में प्रवासी पहाड़ सबसे सुरक्षित मान रहे हैं। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने पर मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही अब तक 18 हजार से अधिक प्रवासी पहाड़ पहुंच चुके हैं। टिहरी जिले के विदेशों में कार्यरत 256 लोग अपने घर लौट आए हैं। इतनी बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहाड़ का रुख करने से ग्रामीणों में भय का माहौल बना है। कई हिस्सों में ग्रामीणों ने खुलकर उनकी वापसी का विरोध किया, जबकि कई स्थानों पर ग्रामीणों ने ऐसे लोगों से दूरी बनाते हुए प्रशासन से उनके मेडिकल परीक्षण की मांग उठाई है।

टिहरी जिले में 14 मार्च से अब तक चीन, जापान सहित अन्य देशों में कार्यरत जिले के 256 लोग अपने घर पहुंच चुके हैं, जबकि देश के विभिन्न राज्यों में कार्य करने वाले जिले के 6268 लोग भी अपने गांव पहुंचे हैं। प्रशासन के मुताबिक एयरपोर्ट के अलावा जिले की चेक पोस्टों पर भी ऐसे लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। ग्राम प्रधानों से भी बाहर से आने वाले लोगों की सूची मांगी गई है।

टिहरी के डीएम डॉ वी षणमुगम का कहना है कि विदेशों से लौटे जिले के किसी भी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग के लिए जिले में अलग-अलग स्थानों पर आठ चेक पोस्ट बनाए गई हैं, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कर रही है। पौड़ी जिले में 6897 प्रवासी अपने गांव पहुंचे हैं। इनमें तीन लोग दूसरे देशों से लौट आए हैं।

रुद्रप्रयाग जिले में लगभग 1800 प्रवासी गांव आए हैं। इन लोगों के लिए गांवों में क्वारंटीन केंद्र बनाए गए हैं। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि सभी प्रधानों को अपने-अपनी ग्राम पंचायतों में लौट रहे प्रवासियों की सूचना हर दिन प्रशासन को देने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रवासियों की घर वापसी से भयभीत हैं स्थानीय लोग

कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में मार्च माह के भीतर ही बाहरी देशों से 39 प्रवासी उत्तरकाशी स्थित अपने गांवों में पहुंचे हैं, जबकि ढाई हजार से अधिक लोग देश के विभिन्न प्रांतों से घर वापस लौटे हैं। बाहरी क्षेत्रों से आए इन लोगों की घर वापसी से स्थानीय लोगों को संक्रमण का भय सता रहा है। हालांकि प्रशासन बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों को होम क्वारंटीन में रहने की हिदायत देने के साथ ही निरंतर उनकी मॉनीटरिंग भी कर रहा है।
मार्च माह में ही जिले में विभिन्न देशों से कुल 39 प्रवासी उत्तरकाशी स्थित अपने घरों तक पहुंच चुके हैं। इनमें सर्वाधिक 11 प्रवासी दुबई, 9 नेपाल, 3-3 सिंगापुर और जापान, 2-2 मलेशिया और वियतनाम तथा 1-1 न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, मस्कट, थाईलैंड, सऊदी अरब, कीनिया, ओमान और कंबोडिया से आए हैं। डुंडा प्रखंड के गांवों में कुल 16, चिन्यालीसौड़ में 15, भटवाड़ी और नौगांव में 3-3 तथा मोरी प्रखंड में 2 प्रवासी पहुंचे हैं। इनके अलावा देश के विभिन्न प्रांतों से भी करीब ढाई हजार लोग उत्तरकाशी अपने गांवों में लौटे हैं।
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि बाहर से आए लोगों को जिले में प्रवेश देने से पूर्व इनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया था। इसमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं पाया गया। इसके बावजूद इन सभी लोगों को होम क्वारंटीन में रहने की हिदायत दी गई है। साथ ही इनकी निरंतर मॉनीटरिंग की जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांवों में भेजा जा रहा है। अभी तक जनपद में कोरोना संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है।
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मजदूरों व निराश्रितों के सामने रोटी का संकट

लॉकडाउन के दौरान काम कारोबार ठप पड़ने से बाहरी क्षेत्रों से आए मजदूरों के समक्ष आजीविका के साथ ही दो वक्त की रोटी जुटाने का संकट खड़ा हो गया है। इन मजदूरों को दूरस्थ राज्यों में रह रहे अपने परिजनों की चिंता भी सताने लगी है। ऐसे में कई मजदूर तो पैदल ही अपने घर लौटने लगे हैं।
बिहार, नेपाल, झारखंड, उड़ीसा आदि राज्यों से यहां मजदूर आए हैं। लॉकडाउन के चलते काम ठप होने से मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। राशन कार्ड नहीं होने के कारण इन्हें सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान से भी राशन नहीं मिल रहा। कमोबेश यही स्थिति जिले के विभिन्न शहरों में मांग कर अपना पेट भरने वाले बेघर, बेसहारा, भिखारी एवं साधुओं की भी है।
ऑल वेदर रोड परियोजना में कार्य कर रहे बारामूला जम्मू कश्मीर के डेढ़ दर्जन मजदूर बृहस्पतिवार को अपने मेट पर बिफर गए। उन्होंने मेट से गांव छोड़ने की मांग की। मामला पुलिस तक पहुंचा, तो पुलिस ने भी उन्हें लॉकडाउन में कहीं जाने की अनुमति नहीं होने की बात कहते हुए समझाने की कोशिश की। लेकिन आठ मजदूर पैदल ही घर के लिए चल पड़े। दर्जी की दुकान में काम करने वाले बिजनौर के कुछ कारीगरों ने भी थाने पहुंचकर अपने घर जाने की गुहार लगाई। पुलिस ने इन लोगों को उच्चाधिकारियों से बात कर जल्द ही राशन पानी की व्यवस्था का भरोसा दिलाया।
एसडीएम देवेंद्र नेगी ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जिले में बाहर से आकर कार्य करने वाले बिना राशन कार्ड वाले श्रमिकों व निराश्रितों को चिह्नित किया जा रहा है। मजदूरों के लिए सात दिन की जरूरत के सामान के पैकेट तैयार कराए जा रहे हैं, जो समाज कल्याण विभाग, तहसील एवं ब्लाक के माध्यम से वितरित कराए जाएंगे। निराश्रित लोगों के लिए खाने के पैकेट तैयार कराकर उन्हें मौके पर ही वितरित किए जा रहे हैं।
मजदूरों के हर्षिल पहुंचने पर हड़कंप
उत्तरकाशी/श्रीनगर। पूरे देश में लॉक डाउन के बावजूद बाहरी क्षेत्रों से लोगों की आवाजाही जारी रहने से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। बुधवार देर रात को हरिद्वार आदि स्थानों से एक दर्जन से ज्यादा मजदूर हर्षिल पहुंचने से यहां हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराकर इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है।
पैदल ही निकले घर की ओर
श्रीनगर/चंबा। श्रीनगर पहुंचे बस चालक और परिचालक भरत सिंह व नारायण सिंह ने बताया कि वह कर्णप्रयाग के रहने वाले हैं। बस तो ऋषिकेश में खड़ी कर दी है और पैदल ही घर की ओर निकल पड़े हैं। शुक्रवार तड़के ऋषिकेश से पैदल चले और बृहस्पतिवार को श्रीनगर पहुंच गए हैं। वहीं, कीर्तिनगर के पास सड़क किनारे आराम कर रहे सात मजदूरों ने बताया कि वह देहरादून के हैं। केदारनाथ बर्फ हटाने के काम में लगे थे, लेकिन अब घर जा रहे हैं। रुद्रप्रयाग तक तो वाहन से आए, लेकिन अब पैदल ही देहरादून जा रहे हैं। रास्ते में खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ब्रेड और पानी से ही भूख प्यास मिटा रहे हैं। कोई लिफ्ट भी नहीं दे रहा है।
उधर, टिहरी के तीन युवक वाहन नहीं मिलने के कारण रजाखेत के तीन युवक पैदल ही चंबा पहुंचे। रजाखेत के सुमित, सचिन और अंकित ने बताया कि वह ऋषिकेश होटल में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन होने से वाहन नहीं मिले तो वे ऋषिकेश से पैदल ही चल पड़े। रास्ते में एक वाहन ने खाड़ी तक छोड़ा, लेकिन उसके आगे कोई नहीं मिला।
2837 प्रवासी पहुंचे हैं गांव
कोटद्वार। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए मैदानी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार 21 से 24 मार्च तक सात ब्लाकों के 589 ग्राम पंचायतों में अब तक 2837 प्रवासी पहुंचे हैं। बीरोंखाल ब्लॉक में सबसे ज्यादा 610 प्रवासी पहुंचे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी पौड़ी एमएम खान ने बताया कि द्वारीखाल ब्लाक के 97 गाम पंचायतों में 576, जयहरीखाल ब्लाक के 73 ग्राम पंचायतों में 112, रिखणीखाल ब्लाक के 81 ग्राम पंचायतों में 331, यमकेश्वर ब्लाक के 86 ग्राम पंचायतों में 284 प्रवासी अपने गांव पहुंचे हैं। बीरोंखाल ब्लाक के 97 ग्राम पंचायतों में 610, दुगड्डा ब्लाक के 67 ग्राम पंचायतों में 436 और नैनीडांडा ब्लाक के 88 ग्राम पंचायतों में 488 प्रवासी अपने गांव पहुंचे हैं।
प्रवासियों को किया जाए क्वारंटीन
कोटद्वार। गांव पहुंचे प्रवासियों के स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होने के कारण स्थानीय लोग प्रवासियों का विरोध कर रहे हैं। स्थिति यह है कि दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, देहरादून, गाजियाबाद, मेरठ आदि मैदानी क्षेत्र से अपने गांव लौट रहे प्रवासियों से स्थानीय लोग खौफजदा है। कई गांवों में प्रवासियों के मेडिकल जांच को लेकर गांव में दो फाड़ हो रहे हैं, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने मैदानी क्षेत्रों से पहुंच रहे लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करने और उन्हें दो सप्ताह क्वारंटीन सेंटर में रखने की मांग की है।
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चिन्यालीसौड़ में पेयजल का संकट

नगर पालिका क्षेत्र के नागणी धनपुर, बड़ेथी, सूलीठांग, मुख्य बाजार एवं पीपलमंडी आदि क्षेत्रों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। नलों में पानी नहीं आने के कारण लोग लॉक डाउन का उल्लंघन कर सार्वजनिक स्थानों से पानी भरने को मजबूर हैं।
ऑल वेदर रोड निर्माण कार्य के चलते नगर की पेयजल योजना बीते करीब दो हफ्ते से ठप पड़ी है। धरासू के निकट पेयजल लाइन का बड़ा हिस्सा भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया है। जल संस्थान के कर्मचारियों ने इस लाइन को दुरुस्त करने का प्रयास किया, लेकिन रुक-रुककर भूस्खलन का सिलसिला जारी रहने से अभी तक लाइन दुरुस्त नहीं हो पाई है। नगरवासी बड़ेथी गदेरे और हैंडपंपों से पानी भरने को मजबूर हैं। नगरवासियों ने प्रशासन से शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुचारु कराने की मांग की है।
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