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IMA POP 2021 : उत्तराखंड के सपूतों ने दिखाया दमखम, स्वर्ण और रजत पदक किए अपने नाम 

आईएमए की पासिंग आउट परेड में उत्तराखंड के सपूतों ने जमकर दमखम दिखाया। अकादमी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिलने वाले दो अहम पुरस्कार स्वर्ण और रजत पदक उत्तराखंड के नाम रहे।

IMA POP 2021 : भारतीय सेना का हिस्सा बने 341 कैडेट, तस्वीरों में देखें उनकी आन, बान और शान

वहीं देशभर के 341 कैडेटों में से 37 कैडेटों के साथ उत्तराखंड इस बार तीसरे नंबर पर रहा। आईएमए से पासआउट होने वाला हर 12वां अधिकारी उत्तराखंड से है। वहीं भारतीय सेना का हर पाचवां जवान भी इसी वीरभूमि में जन्मा है। 

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ध्याडी गांव अल्मोड़ा के दीपक सिंह को मिला गोल्ड मेडल 
स्वर्ण पदक से नवाजे गए दीपक सिंह ध्याड़ी गांव अल्मोड़ा के रहने वाले हैं। उनके पिता त्रिलोक सिंह फौज से हवलदार पद पर रिटायर हुए हैं। शुरुआत से ही सैन्य परिवेश में रहे दीपक की इच्छा थी कि वह सैन्य अफसर बनें।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल बेंगलुरु से हुई। अपनी लगन व परिश्रम से उन्होंने एनडीए की प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। अब न केवल उनका सपना पूरा हो गया है, बल्कि आईएमए में रहकर उन्होंने अपनी काबिलियत भी साबित की।
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आईएमए की पासिंग आउट परेड आईएमए की पासिंग आउट परेड

IMA POP 2021 : किसी ने पूरी की नाना की इच्छा तो कहीं अफसर बेटे को सैल्यूट कर फफक पड़े पिता

इसी वर्ष 10वीं गढ़वाल राइफल से हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए जयप्रकाश भट्ट के सामने शनिवार को जब बेटा सुमित सैन्य अफसर की वर्दी में पहुंचा तो वो अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। बेटे को सैल्यूट किया और फफक पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी पिता के लिए इससे बड़े गौरव का क्षण नहीं हो सकता कि वो अपने अफसर बेटे को सैल्यूट करे।

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मूलत: मानपुर, भटवाड़ी, उत्तरकाशी निवासी जयप्रकाश भट्ट और तामेश्वरी भट्ट के बेटे सुमित ने उन्हें शनिवार को ऐसी खुशी दी, जिसे वह जिंदगी भूलना नहीं चाहेंगे। 2015 में उत्तरकाशी से हाईस्कूल करने के बाद सुमित ने केवी ओएनजीसी से 11वीं व 12वीं की पढ़ाई की। बचपन से ही बेहद कुशाग्र बुद्धि के सुमित ने पहले ही प्रयास में एनडीए में सफलता हासिल कर ली।

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पिता ने बताया कि दादा सुरेंद्र प्रसाद भट्ट हमेशा चाहते थे कि सुमित भारतीय सेना में अफसर बने। शनिवार को जब उन्होंने अफसर की वर्दी पहनी तो पूरे परिवार के लिए यह बेहद गौरान्वित करने वाला क्षण था। 

पिता जयप्रकाश ने कहा कि मैं सिपाही के तौर पर भर्ती हुआ। लेकिन मैंने हमेशा चाहा कि मेरा बेटा सेना में अफसर बने। मैं अपने बेटे को सैल्यूट करूं। अब सुमित को 3/8 गोरखा राइफल्स में तैनाती मिली है। उनका परिवार एमबी होम, आर्मी हॉस्टल में निवास करता है। 

फौजी मामा ने सेना में अफसर बनने का सपना दिखाया
फौजी मामा ने कोट बागेश्वर निवासी भरत सिंह फरस्वाण को बचपन में सेना में अफसर बनने का सपना दिखाया। शनिवार को जब भरत भारतीय सैन्य अकादमी सेपास आउट होकर बतौर अफसर भारतीय सेना में शामिल हुए तो मामा समेत पूरे परिवार की खुशी की ठिकाना नहीं रहा। भरत के पिता हरीश फरस्वाण किसान और मां पार्वती देवी गृहणी हैं।

उनकी प्राथमिक शिक्षा कोट स्थित से ही हुई। छठवीं से 12वीं तक सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारतीय सेना को अपना लक्ष्य बना लिया। मामा बहादुर सिंह कोरंगा खुद फौज में थे। वो हमेशा भरत को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते। उनके कहने पर ही भरत का एडमिशन सैनिक स्कूल में कराया गया।

2017 में एनडीए में चयनित होने के बाद उनका अफसर बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। भरत के बड़े भाई दीपक फरस्वाण हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में कार्यरत हैं, जबकि बहन की शादी हो चुकी है। उनके अफसर बनने पर परिवार के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी खुशी जताई है । 
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उत्तराखंड :  मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का शासनादेश जारी, कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों को मिलेगा लाभ

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का लाभ मिलेगा। नौ जून को कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से शनिवार को इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।

उत्तराखंड : ब्लैक फंगस के 11 नए मरीज, दो की मौत, कुल मरीजों की संख्या 380 हुई

विभाग के सचिव हरि चंद्र सेमवाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि योजना एक मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगी। शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मार्च 2020 के बाद कोविड-19 महामारी एवं अन्य बीमारियों से माता-पिता, दोनो में से एक या संरक्षक की मृत्यु पर जन्म से 21 साल तक के प्रभावित बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा।

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प्रभावित बच्चों की देखभाल, पुनर्वास, चल-अचल संपत्ति, उत्तराधिकारों एवं विधिक अधिकारों के संरक्षण के लिए इस योजना का संचालन किया जा रहा है। 

कोविड-19 महामारी व अन्य बीमारियों से हुई मृत्यु पर योजना लागू होगी
निदेशक महिला कल्याण को जारी आदेश में कहा गया है कि इस अवधि में कोविड-19 महामारी व अन्य बीमारियों से हुई मृत्यु पर योजना लागू होगी। प्रभावित बच्चों को इस योजना से 21 साल की आयु तक आर्थिक सहायता मिलेगी। आदेश में कहा गया है कि राज्यपाल की ओर से योजना के संचालन की मंजूरी दी गई है। योजना के क्रियान्वयन के लिए अलग से दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। 

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को योजना का लाभ देने में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए पूर्व में ही सख्त निर्देश दिए गए हैं। सरकार कोविड काल में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों को लेकर चिंतित है। प्रयास किया जा रहा था कि योजना को जल्द लागू किया जाए। 
- रेखा आर्य, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री
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उत्तराखंड : ब्लैक फंगस के 11 नए मरीज, दो की मौत, कुल मरीजों की संख्या 380 हुई

प्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। शनिवार को देहरादून जिले में 11 नए मामले और दो मरीजों की मौत हुई है। ब्लैक फंगस मरीजों की कुल संख्या 380 हो गई है। जबकि 60 मरीजों की मौत हो चुकी है। 
 
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स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार शनिवार को देहरादून जिले में 11 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। जबकि दो मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा है। देहरादून में कुल मरीजों की संख्या 342 हो गई है।

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ब्लैक फंगस से 53 मौत देहरादून जिले में हुई हैं। नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी, हरिद्वार जिले में अब तक कुल 38 मरीज मिले हैं। जबकि सात मरीजों की मौत हो चुकी है।

गौरव के इलाज के लिए 3.17 लाख जुटाए 
ब्लैक फंगस से अपनी एक आंख, जबड़ा और नाक की हड्डी गंवाने वाले हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी गौरव सिंह चौहान की आर्थिक मदद के लिए क्षत्रिय समाज ने 3,17000 रुपये जुटाए हैं।

क्षत्रिय चौहान महासभा बहादराबाद के संरक्षक दयानंद बाबू ने धनराशि गौरव की मां को सौंपी। इस दौरान ठाकुर सचिन चौहान महामंत्री भेल क्षत्रिय समाज रानीपुर हरिद्वार, सुनील औरंगाबाद, संदीप जी बोंगला, सतेंद्र चौहान धीरवाली, प्रदीप, अश्वनी, सुधांशु, सागर मौजूद रहे।

स्टांप बेचकर परिवार का भरण पोषण करना वाला गौरव सिंह चौहान ब्लैक फंगस की चपेट में आने के बाद से एम्स ऋषिकेश में भर्ती हैं। उसके इलाज में आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। क्षत्रिय समाज की पहल पर गौरव के इलाज के लिए तीन लाख 17 हजार रुपये की धनराशि दी गई। एक लाख आठ हजार रुपये की धनराशि कुछ दिन पहले ही समाज की ओर से दी गई।
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उत्तराखंड में कोरोना: 463 नए संक्रमित मिले, 19 की मौत, 695 मरीज हुए ठीक 

ब्लैक फंगस
उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 463 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं 19 मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा 695 मरीजों को आज ठीक होने के बाद घर भेजा गया। 

अमर उजाला टीका ही बचाएगा अभियान: पाठकों ने अपनी रचनाओं के जरिए दिया टीकाकरण का संदेश

प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल मामलों की संख्या तीन लाख 36 हजार 616 हो गई है। इनमें से तीन लाख 18 हजार 930 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, वर्तमान में 5737 सक्रिय मरीजों का उपचार चल रहा है।

प्रदेश में 24 घंटे में 19 कोरोना मरीजों की मौत हुई है। राज्य में कोरोना के चलते अब तक 6928 लोगों की जान जा चुकी है।

वर्तमान में आठ जनपदों में अब 95 कंटेनमेंट जोन

प्रदेश में कोरोना संक्रमण थमने से अब पाबंदी भी कम होने लगी है। वर्तमान में आठ जनपदों में अब 95 कंटेनमेंट जोन रह गए हैं। जबकि पांच जिलों में एक भी कंटेनमेंट जोन नहीं है। 

कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से कंटेनमेंट जोन बना कर पाबंदी लगाई गई थी। मई माह में 13 जनपदों में चार सौ से अधिक कंटेनमेंट जोन घोषित किए गए थे।

संक्रमण की रफ्तार धीमी होने के साथ ही कंटेनमेंट जोन लगातार कम हो रहे हैं। वर्तमान में देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, उत्तरकाशी, चंपावत, चमोली, टिहरी, अल्मोड़ा जिले में 95 कंटेनमेंट जोन हैं। जहां पर आवश्यक सेवाओं को छोड़ कर अन्य गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और  नैनीताल जिले में एक भी कंटेनमेंट जोन नहीं है।
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उत्तराखंड : सौर ऊर्जा से रोशन होंगे हरिद्वार समेत छह रेलवे स्टेशन, पर्यावरण संरक्षण के साथ बचेगी बिजली

पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली खर्च बचाने के लिए रेलवे स्टेशनों को पूरी तरह से हरित ऊर्जा से रोशन करने की योजना तैयार हो गई है। हरित ऊर्जा का दायरा इतना बड़ा होगा कि स्टेशन की लाइटों के अलावा सिग्नल प्रणाली भी इसी से संचालित किए जाएंगे। इसके लिए देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के छह स्टेशनों पर सौर ऊर्जा पैनल लगाए जा रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर रेलवे बेहद गंभीर है। साथ ही कोरोना काल में हुए नुकसान को कम करने के लिए भी रेलवे कई तरह की योजनाएं बना रहा है। बता दें कि रेलवे स्टेशनों को रोशन करने में बिजली मद में हर महीने लाखों रुपये खर्च होते हैं। इस खर्च में कमी लाने के लिए रेलवे स्टेशनों को सोलर प्लेट से आच्छादित किया जा रहा है ताकि स्टेशनों पर होने वाली ऊर्जा की खपत को ज्यादा से ज्यादा हरित ऊर्जा से पूरा किया जा सके।

वहीं, परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों के लगातार खत्म हो रहे भंडार को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय देशभर में हरित ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। रेलवे सर्वाधिक ऊर्जा की खपत करने वाले विभागों में से एक है। ऐसे में रेल परिसरों में चलने वाले तमाम उपकरणों के लिए भी हरित ऊर्जा के तौर पर सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत छह स्टेशनों पर सौर ऊर्जा की प्लेटें लगाई जा रही हैं। संवाद 

पूरी बिल्डिंग को मिलेगी बिजली
सौर ऊर्जा पैनल लगने से पूरे स्टेशन को बिजली मिलेगी। पावर केबिन से लेकर रिटायरिंग रूम, रनिंग रूम, वेटिंग हॉल, आरक्षण कक्ष, साधारण टिकट काउंटर, जीआरपी, आरपीएफ के थाने, अतिथि कक्ष में भी सौर ऊर्जा से ही कूलर, पंखे व लाइटें चलेंगी। वहीं, हरिद्वार और देहरादून रेलवे स्टेशन पर तो ट्रेनों को धोने के लिए भी सौर ऊर्जा पैनल का ही इस्तेमाल किया जाएगा। 
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NDA परीक्षा के लिए आवेदन शुरू, 29 जून तक है मौका

IMA POP 2021 : भारतीय सेना का हिस्सा बने 341 कैडेट, तस्वीरों में देखें उनकी आन, बान और शान

भारत माता तेरी कसम तेरे रक्षक बनेंगे हम... आईएमए गीत पर कदमताल करते जेंटलमैन कैडेट ड्रिल स्क्वायर पर पहुंचे तो लगा कि वीर जवानों का विशाल सागर उमड़ आया है। एक साथ उठते कदम और गर्व से तने सीने दर्शक दीर्घा में बैठे हरेक शख्स के भीतर ऊर्जा का संचार कर रहे थे। आज भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में अंतिम पग भरते ही 341 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। इसके साथ ही 84 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए। पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी ले. जनरल आरपी सिंह ने परेड की सलामी ली। मार्कर्स कॉल के साथ परेड का आगाज हुआ। कंपनी सार्जेट मेजर जयदीप सिंह, शिवजीत सिंह संधु, पीडी शेरपा, राहुल थापा, सक्षम गोस्वामी व जीतेंद्र सिंह शेखावत ने ड्रिल स्क्वायर पर अपनी-अपनी जगह ली। 8 बजकर 01 मिनट पर एडवांस कॉल के साथ ही छाती ताने देश के भावी कर्णधार असीम हिम्मत और हौसले के साथ कदम बढ़ाते परेड के लिए पहुंचे। इसके बाद परेड कमांडर दीपक सिंह ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली। कैडेट्स के शानदार मार्चपास्ट से दर्शक दीर्घा में बैठा हर एक शख्स मंत्रमुग्ध हो गया। ले. जनरल सिंह ने कैडेटों को ओवरऑल बेस्ट परफॉर्मेंस व अन्य उत्कृष्ट सम्मान से नवाजा।
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