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तेरी ख़ुशी में शरीक था

Anonymous UserAnonymous User Updated Fri, 25 Sep 2020 03:20 PM IST

तेरी ख़ुशी में शरीक था, ग़म में तेरे बेज़ार था
ख़ामोश रह कर बह गया, वो अश्क़ तेरा यार था

दिल टूटने की कशमकश, इक कहकहे में कह गया
या तुम बड़े मासूम हो, या वो बहुत अय्यार था

क्यूं वापस दबे पांव चल, दहलीज़ से दस्तक गयी
किस जुर्म का इक़बाल था, किस दर्द का इज़हार था

अब ‘बेसबब’ हम क्यूं करें, तस्दीक़ बीते वक़्त की
दिल का भरम ही था मगर गुजरा वह ख़ुश-गंवार था

- सतीश चंद्र गुप्त

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