दोस्त बना 'दुश्मन', चीन ने नेपाल की जमीन पर किया 11 इमारतों का निर्माण 

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Updated Wed, 23 Sep 2020 04:54 PM IST
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नेपाल-चीन
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चीन किसी का सगा नहीं हो सकता। वह जिस देश के साथ दोस्ती करने का ढोंग रचता है, उसी को बहुत जल्द दुश्मन भी बना लेता है। यह चीन की पुरानी आदत है। अपनी विस्तारवादी नीति को लेकर चीन किसी भी हद तक जा सकता है और गया है। यह पूरी दुनिया को मालूम है। 
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चीन ने नेपाल को भी नहीं छोड़ा
दोस्त बनकर दुश्मन का किरदार निभाने वाल चीन ने नेपाल को भी नहीं छोड़ा। नेपाली मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने नेपाल की जमीन पर 11 इमारतों का निर्माण किया है। इसको लेकर अब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की शुरुआत हो गई है।




साल 2005 में उस क्षेत्र में एक झोपड़ी थी
हाल ही में इलाके का दौरा करने वाले नेपाल के अधिकारियों की मानें तो साल 2005 में उस क्षेत्र में एक झोपड़ी थी। अपने टीम के अधिकारियों के साथ रविवार को इलाके का दौरा करने वाले नाम्खा ग्रामीण नगर पालिका के अध्यक्ष बिष्णु बहादुर तमांग ने कहा, 'चीनी पक्ष ने दावा किया है कि जिस क्षेत्र में वे मकान बने हुए हैं, वह इलाका उनकी सीमा में आता है।'

विवादित क्षेत्र की इन 11 इमारतों में से एक में सुरक्षाबल रहते हैं
हालांकि, तमांग ने कहा कि नेपाल की सीमा इमारत से उत्तर की ओर दो किलोमीटर आगे तक है। वहीं, काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, विवादित क्षेत्र की इन 11 इमारतों में से एक में सुरक्षाबल रहते हैं, जबकि बाकी खाली हैं।' चीनी सुरक्षा और सीमा बलों द्वारा इमारतों के निर्माण की जानकारी नेपाल के गृह मंत्रालय को दे दी गई है। 

सीमा में आने वाला इलाका
तमांग ने कहा, 'हमने विवादित क्षेत्र में डेढ़ घंटे का वक्त बिताया। वहां पहुंचने के बाद, चीनी सेना की एक टीम और सुरक्षाबल वहां आए और कहा कि उनकी सीमा में बातचीत नहीं हो सकती है। इसके बाद हम वहां से वापस आ गए। हमने उस क्षेत्र के हमारी सीमा में होने का दावा किया, लेकिन उन्होंने हमें मैप दिखाते हुए बताया कि यह उनकी सीमा में आने वाला इलाका है।'

गृह मंत्रालय हरकत में
इस मामले की जानकारी मिलते ही गृह मंत्रालय ने सरकारी अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख, हुमला से नाम्खा ग्रामीण नगर पालिका के स्थानीय सरकारी प्रतिनिधियों को निरीक्षण करने और एक रिपोर्ट सौंपने के लिए वहां पर भेजा। इस रिपोर्ट के इस सप्ताह के अंत तक आने की उम्मीद है। 
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