चीन ने नेपाल के सात जिलों की हड़पी जमीन, दोलखा में 1.5 किमी भीतर घुसा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Updated Sun, 23 Aug 2020 06:31 AM IST
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शी जिनपिंग और नेपाल के पीएम ओली
शी जिनपिंग और नेपाल के पीएम ओली - फोटो : पीटीआई

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चीन की विस्तारवादी नीति नेपाल में अनियंत्रित होती जा रही है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के मौन समर्थन के साथ चीन कई स्थानों पर धीरे-धीरे नेपाली भूमि पर अतिक्रमण कर रहा है। नेपाल के कृषि मंत्रालय के सर्वेक्षण विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने सात सीमावर्ती जिलों में कई स्थानों पर नेपाल की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग तेजी से आगे बढ़ रहा है और अधिक से अधिक भूमि का अतिक्रमण कर नेपाली सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है।  माना जा रहा है कि वास्तविकता ज्यादा बदतर हो सकती है क्योंकि नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के विस्तारवादी एजेंडे पर चुप्पी साधे बैठी है। 
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नेपाल के दोलखा, गोरखा, दार्चुला, हुमला, सिधुपालचौक, संखुआसभा और रसूवा जिले चीन की विस्तारवादी नीति का शिकार बने हैं। नेपाल के सर्वेक्षण और मानचित्रण विभाग के मुताबिक, चीन दोलखा स्थित अंतर्राष्ट्रीय सीमा का 1.5 किमी मीटर हिस्सा हड़प चुका है। उसने कोरलांग क्षेत्र के पिलर संख्या 57 पर भी अतिक्रमण किया है। दरअसल, यह वो इलाका है जिसकी सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से तनाव चल रहा है और चीनी सरकार नेपाल पर इस सीमा विवाद को अपने हित में सुलझाने को लेकर पहले से दबाव बना रही थी।
 
पिलर 35, 37, 38 की जगह बदली और नेपाल के गांवों पर किया कब्जा
विभाग ने बताया कि चीन ने गोरखा और दार्चुला जिलों में नेपाली गांवों पर कब्जा कर लिया है। चीन ने गोरखा जिले की सीमा पर पिलर नंबर 35, 37, और 38 को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह कर दिया है। वहीं नांपा भांज्यांग में पिलर 62 पर भी जमीन हड़प ली है।  पहले 3 पिलर गोरखा के रुई गांव और टोम नदी के करीब थे।

चीन ने 2017 में ही पूरा गांव हड़पने के साथ इस इलाके को तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ दिया था। हालांकि अभी तक ये गांव नेपाल के नक्शे में है और स्थानीय लोग नेपाल सरकार को ही अपना कर देते हैं। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी तरह दार्चुला के जियूजियू गांव का एक हिस्सा भी चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है। इस वजह से नेपाल के कई घर अब चीनियों के अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं।
 
नदियों का रुख मोड़ कब्जा करने की कोशिश
नेपाल के कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में भी कुछ दिनों पहले चीन के कई इलाकों में नेपाली जमीन हड़पने का खुलासा हुआ था। जिसमें नेपाली जिलों के 11 स्थानों पर अवैध चीनी कब्जे का जिक्र था। हुमला जिले में चीन ने सड़क निर्माण के जरिये बागडारे खोला और करनाली नदी का रुख मोड़ जमीन कब्जा करने की कोशिश की। तिब्बत में निर्माण गतिविधियों के चलते सिनजेन, भुरजुक और जंबुआ खोला के रुख में हुए बदलाव से रसुवा की जमीन पर चीनी कब्जे की जानकारी साझा की गई थी। वहीं अरुण नदी, कमखोला नदी, समदुग नदी के पास भी चीन की हरकतों का खुलासा हुआ था।
 
2005 से विवाद, 2012 में वार्ता हुई रद्द
नेपाल सरकार 2005 से चीन के साथ सीमा विवाद में उलझी है। विवाद के चलते नेपाल ने 2012 में हुई सीमा संबंधी वार्ता को भी रद्द कर दिया था लेकिन पिछले कुछ सालों से एनसीपी सीसीपी के हाथ की कठपुतली बन चुकी है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों और नदियों तक चीन की पहुंच हो चुकी है।
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