ऑनलाइन नफरत के ऑफलाइन दुष्परिणामों को रोकने में 'देश व कंपनियां नाकाम'

यूएन हिंदी समाचार Updated Tue, 29 Oct 2019 05:05 AM IST
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online hate - फोटो : Unsplash

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अभिव्यक्ति की आजादी पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ (विशेष रैपोर्टेयर) डेविड काए ने कहा है कि ऑनलाइन माध्यमों पर फैल रही नफरत पर रोक लगाने में देश और कंपनियां विफल साबित हो रही हैं। सोमवार को एक रिपोर्ट भी जारी की गई है जिसमें इस विकराल चुनौती से निपटने के लिए इंटरनेट पर कानूनी मानकों का सहारा लेने की बात कही गई है।
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विशेष रैपोर्टेयर ने सचेत किया कि ‘हेट स्पीच’ के विषय में एक सुसंगत नीति ना होने और सही ढंग से निगरानी किए जाने से डिजिटल युग उसके वास्तविक खतरे हैं जिसका शिकार सबसे पहले वंचित समुदाय होता है। सोमवार को इस नई रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया गया है।
सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर एक खुला खत लिखकर हेट स्पीच के खतरों के बारे में सतर्क किया था। उनके मुताबिक ऑनलाइन और ऑफलाइन नफरत भरे भाषणों व संदेश के फैलने से सामाजिक और नस्लीय तनाव में बढ़ोत्तरी हो रही है और इससे हमलों को उकसावा मिल रहा है जिसके दुनिया के लिए घातक परिणाम होंगे।
डेविड काए ने कहा कि ऑनलाइन नफरत के बढ़ने से वंचितों को सबसे पहले चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और वही इसका सबसे पहले निशाना बनते हैं। जून 2019 में यूएन प्रमुख ने विदेशियों के प्रति डर और नापसंदगी, नस्लवाद और यहूदीवाद-विरोध जैसी समस्याओं से निपटने के लिए अपनी एक नई योजना को सामने रखा था। उन्होंने आगाह किया था कि नफरत भरे और विध्वंसकारी विचारों को डिजिटल तकनीक से मदद मिल रही है।

संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्ययोजना में नफरत भरे संदेशों के मूल कारणों – हिंसा, हाशिएकरण, भेदभाव और गरीबी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसका मुकाबला करने के लिए कमजोर राष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है।

यूएन प्रमुख से सहमति जताते हुए डेविड काए ने कहा कि ऑनलाइन नफरत को इसलिए कम करके आंका नहीं जा सकता क्योंकि यह ऑनलाइन है। इसके विपरीत ऑनलाइन नफरत जिस तेजी से फैलती है उसके ऑफलाइन गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनके मुताबिक यह सोचा जाना आवश्यक है कि इसकी रोकथाम करते समय सभी के अधिकारों का सम्मान भी किया जा सके।
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