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जलवायु परिवर्तन से बच्चों के लिए खतरनाक बनती जा रही धरती, श्रीलंका और वियतनाम सुरक्षित

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 21 Feb 2020 12:52 PM IST
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दुनिया के हर देश में बच्चों का भविष्य खतरे में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और नामी मेडिकल जर्नल ‘द लान्सेट’ की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार पारिस्थितिकीय क्षरण, पर्यावरण में बदलाव और मार्केटिंग की शोषणकारी नीतियों के चलते किसी भी देश में बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। घातक ग्रीन हाउस गैसों का उत्पादन सबसे ज्यादा अमीर देशों में होता लेकिन उसका खमियाजा गरीब देशों को भुगतना पड़ता है। इसका सबसे खराब असर बच्चों पर पड़ता है।
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‘पर्यावरण आपातकाल’ का दौर
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 20 वर्षों में शिक्षा, पोषण और जीवन काल में बढ़ोतरी के बावजूद बच्चों का अस्तित्व संकट में है। विश्व भर के 40 विशेषज्ञों द्वारा तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2015 में टिकाऊ विकास के लिए लक्ष्य (स्टैंडर्ड डेवलपमेंट गोल्स) पर सहमति दी थी, लेकिन पांच साल बीतने के बाद इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कुछ ही देशों ने जरूरी कदम उठाए हैं। 

यही कारण है कि पर्यावरण में बदलाव, आबादी के स्थानांतरण, पारिस्थितिकी क्षरण, सामाजिक असमानता और मार्केटिंग के गलत तरीकों के चलते बच्चों का स्वास्थ्य और भविष्य लगातार खतरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘पर्यावरण आपातकाल’ के इस दौर में बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए बदलावों की आवश्यकता है।

फास्ट फूड बेचने के लिए अपनाते हैं गलत तरीके
रिपोर्ट में मार्केटिंग की शोषणकारी नीतियों को भी बच्चों की खराब हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इसमें कहा गया है कि साल 1975 में पूरी दुनिया में करीब 1.10 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार थे, लेकिन 2016 में यह संख्या बढ़कर 12.40 करोड़ हो गई। इसका कारण यह है कि कंपनियां फास्ट फूड और पेय पदार्थों की बिक्री बढ़ाने के लिए मार्केटिंग के गलत तरीके अख्तियार करती हैं और बच्चों को अपना निशाना बनाती हैं।

बच्चों के लिए नार्वे, दक्षिण कोरिया बेहतर
रिपोर्ट में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, जीवित रहने की क्षमता, जीवन का आनंद आदि मापदंडों पर 180 देशों की तुलना की गई है और फिर आय की असमानता, ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जैसों पैमानों पर आकलन किया गया है। इसके आधार पर बताया गया है कि नॉर्वे, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड्स, फ्रांस और आयरलैंड बच्चों के विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ देश हैं। 

वहीं चाड, सोमालिया, नाइजीरिया और माली इस लिहाज से सबसे खराब देशों में शामिल हैं। प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के नजरिए से देखें तो, दस देशों में बुरूंडी, चाड और सोमालिया बच्चों के शुरुआती वर्षों के लिए बेहतर हैं जबकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब में हालात सबसे खराब हैं।
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इन नौ देशों का प्रदर्शन सबसे अच्छा

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