भारत ने लड़कियों व बच्चों के प्रति संवेदनशील नीतियां बनाईं : यूएन

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Updated Fri, 25 Sep 2020 01:40 AM IST
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संयुक्त राष्ट्र - फोटो : Facebook

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 विश्व निकाय के महासचिव एंतोनियो गुटेरस की एक रिपोर्ट में भारत में लिंग और बच्चों के प्रति संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को प्रोत्साहित करने संबंधी राष्ट्रीय नीतियों पर पहल का संज्ञान लिया गया।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने बाल विवाह, सही उम्र से पूर्व विवाह और जबरन विवाह झेलने वाली लड़कियों व बच्चों के प्रति संवेदनशील राष्ट्रीय नीतियां विकसित की हैं।
जून 2018 से मई 2020 की अवधि के लिए ‘बाल, समय पूर्व और जबरन विवाह का मुद्दा’ पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों ने विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाने के लिए विधायी एवं नीतिगत उपाय लागू किए हैं और बाल, सही उम्र से पहले एवं जबरन विवाह को रोकने के लिए समग्र रणनीतियां अपनाई हैं।

रिपोर्ट में इन्हीं मुद्दों पर विश्व भर में की गई प्रगति की समीक्षा की गई है। इसमें भारत के अलावा इथियोपिया, घाना, मोजाम्बिक, नाइजर और युगांडा में भी लड़कियों के विवाह, लिंग और बच्चों के प्रति संवेदनशील स्वास्थ्य व सुरक्षा सेवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय नीतियों के विकास और दिशा-निर्देश जारी करने की पहल शुरू करने की प्रशंसा की गई। रिपोर्ट में विवाहित लड़कियों एवं महिलाओं संबंधी नीतियों की भी बात की गई है। 

लाडली सम्मान मुहिम का भी जिक्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ‘लाडली सम्मान’ मुहिम के तहत महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजना और परामर्श दिया गया। यूएनएफपीए-यूनीसेफ के बाल विवाह कार्यक्रम ने भारत में पश्चिम बंगाल के कन्याश्री प्रकल्प कार्यक्रम को समर्थन दिया। इसके तहत बाल विवाह रोकने और शिक्षा जारी रखने के लिए सशर्त नकद हस्तांतरण को प्रोत्साहित किया गया।

विवाहित लड़कियों का सशक्तिकरण
भारत में स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान ने विवाहित लड़कियों को सशक्त बनाने में योगदान दिया और उन्हें स्वास्थ्य, शैक्षणिक, आर्थिक एवं कानूनी सहायता तक पहुंच का मौका मिला। यूनीसेफ के अनुसार पिछले एक दशक में दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा की दर बढ़ने और बाल विवाह के नुकसान और इसकी अवैधता के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा किए जाने के कारण दो करोड़ 50 लाख बाल विवाह रोके गए। 
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