भारत ने मत्ताला हवाईअड्डे के लिए संयुक्त उद्यम नहीं बनाने के श्रीलंका के अनुरोध को माना: राजपक्षे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Updated Fri, 10 Jul 2020 10:03 PM IST
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महिंदा राजपक्षे
महिंदा राजपक्षे - फोटो : Facebook

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने दावा किया है कि उनकी सरकार के अनुरोध करने पर भारत ने देश में मत्ताला राजपक्षे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को चलाने के लिए संयुक्त उद्यम नहीं बनाने का फैसला किया है। कोलंबो से 241 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित 21 करोड़ डॉलर की लागत वाले इस हवाई अड्डे को दुनिया का सबसे खाली हवाई अड्डा कहा जाता है। इसका कारण इस हवाई अड्डे पर उड़ानों की कमी है।
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मत्ताला हवाई अड्डे को उच्च ब्याज दर वाले चीनी वाणिज्यिक ऋण के माध्यम से वित्त पोषित किया गया था। हवाईअड्डे को एक साल में 10 लाख यात्रियों के आवागमन की सुविधा देने की क्षमता के साथ बनाया गया यह हवाई अड्डा आधिकारिक तौर पर मार्च 2013 में खोला गया था। महिंदा राजपक्ष ने कहा कि उन्होंने और उनके भाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने भारत से अनुरोध किया था कि इस हवाई अड्डे को चलाने के लिए संयुक्त उद्यम बनाने की योजना पर आगे नहीं बढ़े। यह हवाईअड्डा उनके गृहनगर में है।
आगामी संसदीय चुनाव के लिए हंबनटोटा के दक्षिणी जिले में गुरुवार को चुनाव प्रचार के दौरान राजपक्षे ने आरोप लगाया कि मैत्रिपाल सिरिसेना और रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने राष्ट्रीय संपत्तियां विदेशी सरकारों को बेच दी थी। सिरिसेना-विक्रमसिंघे सरकार ने 2018 में कहा था कि वह घाटे में चल रहे हवाई अड्डे के संचालन के लिए एक संभावित संयुक्त उपक्रम को लेकर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ बातचीत कर रही है।

हवाई अड्डे को नहीं बेचा जा सका

राजपक्षे ने कहा, 'उन्होंने (पिछली सरकार) बंदरगाह को बेच दिया, लेकिन हवाई अड्डे को नहीं बेचा जा सका। मेरी हालिया भारत यात्रा के दौरान (फरवरी में) और राष्ट्रपति द्वारा भी उनसे कहा था कि कृप्या इसे (हवाई अड्डे) न लें। यह मेरे गांव में स्थित है और यह हमारा दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। उन्होंने (भारत) हमारे अनुरोध पर ध्यान दिया, इसलिए हमने इसे बचा लिया।’
भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। महिंदा राजपक्ष की अगुवाई वाली सरकार के 2005 और 2015 के बीच के कार्यकाल में हंबनटोटा में मत्ताला हवाई अड्डा और निकटवर्ती बंदरगाह प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं थीं।

वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने हंबनटोटा बंदरगाह में एक औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिए चीन के साथ एक दीर्घकालिक पट्टे पर हस्ताक्षर किए। तब राजपक्षे विपक्ष में थे और उन्होंने इस सौदे की आलोचना करते हुए कहा कि यह दरअसल बंदरगाह को बेच देना है। मौजूदा राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने नवंबर 2019 के चुनाव में हंबनटोटा बंदरगाह सौदे को रद्द करने का वादा किया था, लेकिन यह वादा अभी भी पूरा नहीं हुआ है।
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