भारत-नेपाल के बीच नक्शा विवाद के बाद हुई पहली बैठक में नहीं उठे विवादित मुद्दे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Updated Tue, 18 Aug 2020 06:36 AM IST
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केपी  शर्मा ओली और पीएम मोदी(फाइल फोटो)
केपी शर्मा ओली और पीएम मोदी(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

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सार

  • भारत-नेपाल निगरानी तंत्र की यह आठवीं बैठक थी
  • आर्थिक-विकास परियोजनाओं पर ही बात हुई 
  • जल्द हो सकती है विदेश मंत्री स्तर की बातचीत

विस्तार

नक्शा विवाद के बाद भारत-नेपाल के बीच सोमवार को पहली उच्चस्तरीय बैठक हुई। नेपाल में भारत की मदद से चल रही विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए गठित तंत्र की आठवीं बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा हुई। इस दौरान कोई विवादित मुद्दा नहीं उठा। अगस्त अंत या सितंबर में होने वाली राजनयिक स्तर की दूसरे दौर की बैठक में विवादित मुद्दों पर बात होगी। बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्री शिरकत कर सकते हैं। हालांकि इसकी अंतिम रूपरेखा तय होनी अभी बाकी है।
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कोरोना संक्रमण के चलते नेपाल में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी के बीच वर्चुअल बैठक हुई। इसमें द्विपक्षीय आर्थिक और विकास परियोजनाओं की समीक्षा हुई। दोनाें पक्षों ने एक साल में विकास परियोजनाओं में हुई प्रगति की समीक्षा की। इनमें गोरखा और नुआकोट जिले में भूकंप के कारण तबाह हुए 46,301 मकानों का दोबारा निर्माण भी शामिल है। दरअसल, भारत और नेपाल ने पहले ही तय किया है कि विवादित मुद्दों पर चर्चा शीर्ष राजनयिक स्तर पर ही होगी। खासतौर पर सीमा विवाद के लिए पहले से ही विदेश मंत्री स्तर की वार्ता को लेकर दोनों देशों में सहमति बन चुकी है।
कोरोना से निपटने में मदद के लिए आभार
बीते साल आठ जुलाई के बाद पहली बार हुई निगरानी की तंत्र की बैठक में नेपाल ने कोरोना से निपटने में भारत से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। नेपाली विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच तराई रोड, सीमापार रेलवे प्रोजेक्ट, अरुण-3 हाईड्रो पॉवर प्रोजेक्ट और पेट्रोलियम पाइप लाइन को लेकर बातचीत हुई। इस निगरानी तंत्र का गठन 2016 में किया गया था।

विश्वास बहाली को प्राथमिकता
नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने दो-तीन महीनों में अपने बयानों से द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट घोल दी थी। नया नक्शा, सीमा पर फायरिंग, भगवान राम और गौतम बुद्ध की जन्मस्थली जैसे विवादास्पद मुद्दों के तूल पकड़ने से दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करना पहली प्राथमिकता थी। इसके चलते भारत ने विवादास्पद मुद्दों को दूसरे दौर की बैठक तक टालने पर सहमति दी। वहीं, नेपाल के पीएम खुद अपनी पार्टी में अलग-थलग पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत कड़े कदम उठाने से पहले सत्तारूढ़ दल के अंतर्विरोध को उसके परिणाम तक पहुंचने का इंतजार कर रहा है।

भारत जारी रखेगा कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद
भारत कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नेपाल की मदद जारी रखेगा। 23 अप्रैल को नेपाल में राजदूत नियुक्त होते ही क्वात्रा ने एचसीक्यू और पैरासीटामॉल सहित 23 टन दवाईयां नेपाल को सौंपी थी। इसके अलावा 13 मई को 30 हजार जांच किट, नौ अगस्त को 10 वेंटीलेटर नेपाल को सौंपे थे। इसके साथ ही नेपाली सेना को 2.8 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी थी।
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