चीन को गांव 'गिफ्ट' करने पर नेपाल की खुली पोल, 10 जगह 36 हेक्टेयर जमीन पर है अतिक्रमण

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू। Updated Sat, 27 Jun 2020 04:53 AM IST
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भारत-नेपाल सीमा - फोटो : अमर उजाला।

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नेपाल सरकार ने भले ही अपनी जमीन चीन के कब्जे में होने का दावा करने वाली मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया है। साथ ही नेपाल सरकार ने कहा है कि जिस सरकारी दस्तावेज पर ये रिपोर्ट आधारित हैं, उसका अस्तित्व ही नहीं है।
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लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट में नेपाल के कृषि मंत्रालय के सर्वे विभाग के 2017 में जारी उस दस्तावेज को ही पेश कर सरकार की पोल खोल दी गई है, जिसमें चीन पर नेपाल की उत्तरी सीमा में 10 स्थानों पर करीब 36 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण करने की स्पष्ट जानकारी दी गई थी। 
बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर चीन को नेपाली गांव ‘गिफ्ट’ कर देने के आरोप लग रहे हैं। खुद सत्ताधारी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ भी इस मुद्दे पर ओली की आलोचना करते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग कर चुके हैं। लेकिन नेपाल सरकार मीडिया रिपोर्ट को झूठा बताकर पीछा छुड़ा रही है।
लेकिन शुक्रवार को नेपाली समाचार पत्र द हिमालयन टाइम्स ने सर्वे विभाग के दस्तावेज को पेश कर दिया। इस दस्तावेज में कहा गया था कि चीन ने तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र में अपना सड़क नेटवर्क फैला लिया है। इसके चलते कुछ नदियों और उनकी सहायक नदियों ने अपना रास्ता बदल लिया है।

अब ये नदियां नेपाल की तरफ बहने लगी हैं। दस्तावेज में सरकार को चेतावनी दी गई थी कि यदि इन नदियों का यही रुख जारी रहा तो नेपाल की सैकड़ों हेक्टेयर जमीन तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र (टार) का हिस्सा बन जाएगी।

दस्तावेज में यह भी बताया गया था कि इसके चलते नेपाल की हुमला जिले में 10 हेक्टेयर, रसुवा में 6 हेक्टेयर, सिंधुपालचौक में 11 हेक्टेयर और संखुवासभा में 9 हेक्टेयर जमीन चीन के हिस्से में चली गई है। इस दस्तावेज में यह भी अंदेशा जताया गया था कि चीन अपने कब्जे में आ गए इस इलाके में सैन्य पुलिस के जवानों की मदद से निगरानी चौकियां स्थापित कर सकता है।

बता दें कि 25 जून को कुछ मीडिया रिपोर्ट में चीन पर नेपाल के 7 जिलों की जमीन कब्जाने का दावा किया गया था। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय और कृषि मंत्रालय ने अलग-अलग बयान जारी करते हुए इन मीडिया रिपोर्ट को गलत बताया था। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने रिपोर्ट को झूठा बताते हुए कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्र उनके अधीन नहीं आता है।

नेपाली विदेश मंत्रालय ने भी अतिक्रमण को खारिज करते हुए कहा था कि कृषि मंत्रालय पहले ही चीनी कब्जे से जुड़े किसी दस्तावेज की मौजूदगी को नकार चुका है। जिन खंभों के गायब होने की बात कही जा रही है, वे दरअसल वहां थे ही नहीं। हालांकि, मंत्रालय ने अपने बयान में तिब्बत में नदियों का रास्ता मोड़कर जमीन कब्जाने को लेकर कुछ नहीं कहा था।

नेपाली कांग्रेस चाहती है इस मुद्दे पर संसद में बहस
प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के सांसदों देवेंद्र राज कंदेल, संजय कुमार गौतम और सत्यनारायण शर्मा खनाल ने बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर संसद में बहस कराने के लिए प्रस्ताव भी पंजीकृत कराया था। इस प्रस्ताव के मुताबिक, चीन ने दोलका, हुमला, सिंधुपलचौक, संखूवसाभा, गोरखा और रसूवा जिलों में 64 हेक्टेयर की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है।

गौतम ने कहा था कि सरकार को हमारी सीमाएं सुरक्षित होने के सबूत सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने उत्तरी जिलों के कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों के हवाले से भी चीनी कब्जे की पुष्टि की थी।
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