सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी नौकरी की पेशकश में नौ भारतीय यूएई में फंसे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 22 Jul 2019 12:23 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

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रविवार को एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी नौकरी की पेशकश में नौ भारतीय यूएई में फंसे हुए हैं। खलीज टाइम्स ने बताया कि केरल के लोग, वर्तमान में अल ऐन और अजमान में फंसे हुए हैं। रिपोर्ट में दावा है कि उन्होंने शफीक नाम के एजेंट से व्हाट्सऐप पर मुलाकात की और 70,000 रुपये तक का भुगतान किया।
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केरल के मलप्पुरम जिले के पीड़ितों में से एक फाजिल ने कहा कि उन्हें व्हाट्सऐप पर नौकरी का प्रस्ताव मिला। 'एक व्हाट्सऐप संदेश जिसने 15 दिनों के भीतर यूएई में नौकरियों का वादा किया था, केरल में व्यापक रूप से साझा किया जा रहा था, और मुझे भी ये मैसेज प्राप्त हुआ। मुझे लगा कि यह वास्तविक था क्योंकि बहुत से लोग रुचि दिखा रहे थे।'
फाजिल ने कहा कि उनकी एजेंट के साथ बातचीत हुई जिसने उन्हें अल ऐन के सुपरमार्केट में नौकरी देने की बात कही। उन्होंने बताया कि उससे कहा गया था कि उसे मासिक वेतन, मुफ्त भोजन और आवास मिलेगा। फाजिल ने बताया कि मैं कठिन समय से गुजर रहा था, और मुझे लगा कि यह मेरे लिए एक अच्छी शुरुआत होगी। फाजिल ने कहा कि नौकरी के लिए उसने अपनी मां के सोने के गहनों को गिरवी रख दिया।
केरल के कोझीकोड के एक अन्य पीड़ित मोहम्मद रफीक ने कहा कि उसने नौकरी के लिए दोस्तों और परिवार से 70,000 रुपये उधार लिए थे। उन्होंने कहा, 'मेरे सहित नौ लोगों ने भुगतान किया और एजेंट ने हम नौ लोगों के लिए एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया और हम एक-दूसरे के साथ संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा, एजेंट ने उन्हें बताया कि वे संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा करेंगे। रफीक ने कहा कि शमीर नाम के एक स्थानीय एजेंट ने उनसे हवाई अड्डे पर मुलाकात की और पुरुषों को दो समूहों में विभाजित किया।

रफीक ने बताया, चार लोगों को अजमान भेजा गया और हम में से पांच को अल ऐन के पास ले जाया गया। जब उनसे हमने नौकरी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सुपरमार्केट अधिकारी जेल में है और इसलिए उन्हें हमारे लिए नई नौकरियों की तलाश करनी होगी। इसके बाद हमे समझ आ गया कि हम ठगे गए हैं। 

अब भारतीय दूतावास की तरफ से इन लोगों की मदद की जा रही है। वाणिज्य दूतावास ने कहा, 'नौकरी चाहने वालों को इस तरह के फर्जी प्रस्ताव का शिकार नहीं होना चाहिए और किसी भी संदेह के मामले में, वाणिज्य दूतावास से पूछा जा सकता है।
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