नेपाल: कानून में बदलाव होते ही टूट गईं दो अहम पार्टियां, ओली पर लगा आरोप

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू। Updated Fri, 24 Apr 2020 04:11 AM IST
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के पी ओली
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अभी दो दिन भी नहीं गुजरे और नेपाल की ओली सरकार के नए कानून ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। ओली कैबिनेट ने अफरा-तफरी में राजनीतिक दलों के असंतुष्टों के लिए नए रास्ते खोलने वाला जो कानून बनाया उसके बाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता पार्टी में भगदड़ मच गई। रातों-रात दोनों पार्टियां टूट गईं और इनके असंतुष्टों ने मिलकर जनता समाजवादी पार्टी के नाम से एक नई पार्टी बना ली।   
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बुधवार की देर रात समाजवादी पार्टी की उपाध्यक्ष रेनु यादव ने नए कानून के तहत अपनी पार्टी के 40 फीसदी सदस्यों के समर्थन के साथ पार्टी तोड़ दी। उधर, जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता राजेन्द्र महतो ने भी अपनी पार्टी से नाता तोड़कर रेनु यादव के साथ हाथ मिला लिया।


इन दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने एक आपसी सहमति वाले दस्तावेज पर दस्तखत किए और नई पार्टी बनाकर जनता पार्टी के चुनाव चिह्न और समाजवादी पार्टी के झंडे पर अपना दावा जताते हुए एकीकृत पार्टी के तौर पर चुनाव आयोग में पंजीकृत कराने का फैसला किया। राजेन्द्र महतो के मुताबिक दोनों पार्टियां लंबे समय से एकीकरण का रास्ता तलाश रही थीं और ओली सरकार ने कानून में बदलाव करके उनके लिए रास्ता आसान कर दिया।

उनके मुताबिक समाजवादी पार्टी और जनता पार्टी मिलकर एक मजबूत वैकल्पिक ताकत बनने की कोशिश में लंबे समय से थीं, हालांकि कुछ नेता अभी इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन अब दोनों पार्टियों के विलय के बाद संवैधानिक तौर पर हम एक हो गए हैं और कोशिश है कि पार्टी के सभी नेता इस फैसले को स्वीकार कर लें।

दोनों पार्टियां मधेसियों की मजबूत पार्टियां मानी जाती रही हैं, लेकिन आपसी तकरार की वजह से मधेसियों के वोट बैंक बंटते रहे थे, लेकिन अब इन नेताओं को भरोसा है कि उनके एक हो जाने से मधेसियों की आवाज को और मजबूती से उठाया जा सकेगा। 

दोनों पार्टियों के एकीकरण के समझौते पर दस्तखत करने वालों में समाजवादी पार्टी के बाबूराम भट्टाराई, उपेन्द्र यादव, राजेन्द्र श्रेष्ठा और अशोक राय हैं, जबकि जनता पार्टी के महंथ ठाकुर, राजेन्द्र महतो, महेन्द्र राय यादव और शरद सिंह भंडारी के नाम हैं। फिलहाल नेपाली संसद में समाजवादी पार्टी के 17 और जनता पार्टी के 16 सदस्य हैं। यानि कुल मिलाकर 33 सदस्य हैं।

समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि कानून में यह बदलाव करने के पीछे ओली का राजनीतिक मकसद समाजवादी पार्टी को तोड़ना था। इसके लिए उन्होंने रेनु यादव को डिप्टी स्पीकर बनाने का लालच दिया है। साथ ही उनकी पसंद के दो नेताओं को मंत्री बनाने का भी भरोसा दिया गया है। राजेन्द्र महतो ने बताया कि लॉकडाउन खुलने के बाद चुनाव आयोग में दोनों पार्टियों के एकीकरण का पंजीकरण करने के लिए कागजी कार्रवाई की जाएगी।

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