भारत से श्रीलंका गए थे दो तमिल मुस्लिम प्रचारक, पुलिस ने एक को किया था डिपोर्ट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 01 May 2019 09:53 AM IST
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श्रीलंका आत्मघाती हमला (फाइल फोटो)
श्रीलंका आत्मघाती हमला (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

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तमिलनाडु के दो मुस्लिम प्रचारक कुछ साल पहले तौहीद पर प्रवचन देने के लिए श्रीलंका गए थे। तौहीद खुद को इस्लाम का सबसे शुद्ध स्वरूप मानता है। मगर उनमें से एक को उस समय द्वीपीय देश से जाना पड़ा जब स्थानीय मुस्लिमों ने शिकायत की कि वह सांप्रदायिक अशांति पैदा कर रहे हैं। यह बातें उनके पूर्व सहयोगियों ने बताई हैं।
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तमिलनाडु का तौहीद समूह जो श्रीलंका के मुस्लिमों के बीच इस्लाम के शुद्ध स्वरूप का प्रचार करता है, उसकी भूमिका ईस्टर पर हुए सिलसिलेवार धमाके के बाद से स्कैनर पर है। इस आत्मघाती हमले में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 500 लोग घायल हो गए थे। मरने वालों में 11 भारतीय भी शामिल हैं।
एक प्रचारक का नाम पी जैनुउलबदीन है। वह पिछले साल तक तमिलनाडु तौहीद जमात (टीएनटीजे) से जुड़ा हुआ था। उसे कोलंबो में ऑल सीलोन जमिय्यत उल्लमा की शिकायत पर 2006 में पुलिस ने कोलंबों से निर्वासित कर दिया था। मुस्लिमों का कहना था कि उनके उपदेश श्रीलंका के मुस्लिमों के बीच मतभेद पैदा कर रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निर्वासित होने के बाद पीजे के नाम से मशहूर पी जैनुउलबदीन ने 2008 और 2015 में श्रीलंका जाने की कोशिश की लेकिन उसे दोनों बार वीजा देने से मना कर दिया गया। दूसरे तौहीद के प्रचारक का नाम कोवई अय्यूब है जो कोयंबटूर के रहने वाले हैं और जमियत उल कुरान अल हदीथ (जेयूक्यूएच) से जुड़े हैं।

एनटीजे से पहले तमिलनाडु में जेयूक्यूएच संगठन था। कोवई की श्रीलंका में 2009 को उस समय काफी बदनामी हुई जब श्रीलंका के धार्मिक मंत्रालय की शिकायत पर पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया था। एनटीजे ने श्रीलंका के तौहीद जमात के साथ किसी भी तरह के संपर्क होने से मना किया है। उसका कहना है कि वह दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जोरदार तरीके से बोलता है।

एक पूर्व सदस्य ने बताया कि शुरुआत में ही पीजे की पहचान श्रीलंका के मुस्लिम समुदाय के बीच अशांति फैलाने वाले के तौर पर हुई थी। वहीं 1980 में स्थापित हुए संगठन जेयूक्यूएच के प्रचारक कोवई श्रीलंका में तौहीद का संदेश प्रसारित किया करते थे।

तमिलनाडु से दोनों मुस्लिम प्रचारक श्रीलंका गए थे। जिसमें से एक को पुलिस ने ट्रैक कर लिया और दूसरे को देश से निर्वासित कर दिया था। अय्यूब को पुलिस ने पकड़ लिया था। हालांकि वह कुछ समय बाद भारत लौट आए थे। सूत्रों ने कहा दोनों ही प्रचारक उग्र वक्ता हैं और उन्हें तमिलनाडु में मुस्लिम राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्रों में अच्छी तरह से जाना जाता है।

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